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कनेर का तेल त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में बेहद कारगर माना जाता है. इसे बनाने के लिए कनेर के पत्तों या फली को नारियल या जैतून के तेल में डालकर अच्छे से उबालते हैं, फिर ठंडा करके उपयोग में लाते हैं. इसमें पाए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी जैसी परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं. आइए जानते है इस तेल के फायदे…
आपके घर के पास पीले रंग का कनेर का फूल जरूर दिखता होगा. पूजा-पाठ में फूलों का उपयोग होता है. लेकिन, क्या आपको पता है कि इस पौधे के पत्ते, फूल और फली से बनने वाला तेल दर्द सहित कई रोगों में लाभकारी है. आज भी गांवों में लोग इस नुस्खे का इस्तेमाल करते हैं और देशी तरीके से तेल बनाकर प्रयोग करते हैं.

कनेर का तेल बनाने के लिए पत्तों या फली को नारियल या जैतून के तेल में डालकर अच्छे से उबाल लेना चाहिए. फिर इसे निकालकर ठंडा कर लें। ठंडा होने के बाद इस तेल को शीशी में भरकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

कनेर का तेल खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी और त्वचा से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में असरदार है. इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को बेहतर बनाने में बेहद मददगार हैं.

सरसों या जैतून के तेल में उबालकर जोड़ में मालिश करने से दर्द खत्म होता है. साथ ही यह सूजन को भी कम करने में कारगर है. पहले के जमाने में दादी-नानी इसका इस्तेमाल करती थीं और आज भी ग्रामीण इलाकों में दर्द निवारक जेल की जगह इसका उपयोग किया जाता है.

कनेर के पत्ते को एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर पुराने घावों पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है. इसके अर्क का उपयोग संक्रमण को रोकने के लिए भी किया जाता है, अलग-अलग तरीकों से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

अगर आप भी कनेर के तेल का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें. क्योंकि यह बेहद जहरीला पौधा होता है. इसका उपयोग केवल शरीर के बाहरी हिस्से पर करें और तेल लगाने के बाद धूप में जाने से बचें.