कौन हैं ईरान के राजा के बेटे, जो वहां प्रदर्शनों के बीच बड़ी ताकत बनकर उभरे, जिनके लग रहे नारे

ईरानियों के विरोध प्रदर्शनों के बीच निर्वासित शाह पहलवी का बेटा एक ताकत बनकर उभरा है. अमेरिका में दशकों बिताने के बाद ईरान के हालिया विरोध प्रदर्शनों में रजा पहलवी की भूमिका ने लोगों को चकित कर दिया है. रजा पहलवी को बचपन में शाही ईरान का अगला शाह बनने के लिए तैयार किया जा रहा था, इसके बाद उनके पूरे परिवार को वर्ष 1979 में इस्लामी क्रांति के कारण ईरान से भागना पड़ा. तब वह निर्वासन में ही हैं.

“पहलवी वापस आएंगे!” का नारा कई प्रदर्शनकारियों के लिए एक मंत्र बन गया है. ईरान के हालिया विरोध प्रदर्शनों में पहलवी ने “ईरानियों को सड़कों पर उतारने की क्षमता” दिखाई है. रविवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में पहलवी ने कहा कि वह “जैसे ही संभव होगा ईरान लौटने के लिए तैयार हैं”.

1979 में हुई इस्लामी क्रांति ने राजशाही का अंत कर दिया था. रज़ा पहलवी क्रांति के समय ईरान से बाहर थे. वह 1978 की गर्मियों में 17 वर्ष की आयु में संयुक्त राज्य अमेरिका में सैन्य पायलट प्रशिक्षण के लिए चले गए थे. उनके पिता का निधन 1980 में मिस्र में हुआ था. उनकी मां पूर्व महारानी और शाह की तीसरी पत्नी फराह अब 87 वर्ष की हैं.

पहलवी ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि उनका इरादा ईरान के राजा के रूप में ताजपोशी करने का नहीं है, बल्कि वे एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश की ओर संक्रमण का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं.

बढ़ रही उनकी लोकप्रियता

पहलवी लंबे समय से एक धर्मनिरपेक्ष ईरान की वकालत करते रहे हैं जो अधिक सामाजिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, विशेष रूप से महिलाओं के लिए. “ईरान में पहलवी के कई समर्थक हैं. हाल के दिनों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है, क्योंकि उन्हें एकमात्र राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी नेता के रूप में देखा जाता है जिनके पास शासन का सामना करने की कुछ योजना है.

बहन और भाई को दुखद तौर पर खोया

वैसे रजा ने पिता के पतन को देखने के साथ-साथ पारिवारिक त्रासदी भी झेली है. जून 2001 में उनकी छोटी बहन लीला लंदन के एक होटल के कमरे में मृत पाई गईं. बाद में हुई जांच में पता चला कि पूर्व राजकुमारी कथित तौर पर कई वर्षों से अवसाद और खाने के विकार से पीड़ित थीं. उसने निर्धारित दवाओं और कोकीन का घातक मिश्रण लिया था.

छोटे भाई ने खुद को गोली मार आत्महत्या कर ली

जनवरी 2011 में उनके छोटे भाई अली रजा ने बोस्टन स्थित अपने घर में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. परिवार का कहना है कि उन्होंने अपने वतन, पिता और बहन के खोने के गम से उबरने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया. उनकी एक ही जीवित सगी बहन फराहनाज़ हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में रहती हैं लेकिन बहुत ही कम लाइमलाइट में रहती हैं उनकी सौतेली बहन शाहनाज़ भी कम लाइमलाइट में रहती हैं, जिनकी मां शाह की पहली पत्नी फौजिया थीं.

 वाशिंगटन में रहते हैं

वह वर्तमान में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में रहते हैं. उन्होंने शुरू में तेहरान में पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका में पायलट की ट्रेनिंग ली. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया से राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया है. उन्हें मुख्य रूप से ईरानी डायस्पोरा से समर्थन मिलता है, जो इस्लामिक गणराज्य के विरोध और पूर्व राजशाही के लिए पुरानी यादों से प्रेरित हैं.

वह ईरानी प्रवासी समुदायों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं और विभिन्न देशों में राष्ट्राध्यक्षों, सांसदों और नीति निर्माताओं से मिलते रहते हैं. वह ईरान में लोकतंत्र आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा हैं. वह नेशनल काउंसिल ऑफ ईरान नामक एक निर्वासित ईरानी विपक्षी समूह के संस्थापक और नेता हैं. रजा पहलवी ईरान में मानवाधिकारों और लोकतंत्र के लिए अभियान चलाते हैं. कुछ रिपोर्टों के अनुसार उन्हें अमेरिका और इजरायल का समर्थन प्राप्त है.

इस बार उन्हें ईरान में समर्थन मिल रहा

हालांकि ईरान के अंदर रेजा पहलवी की कोई औपचारिक राजनीतिक ताकत नहीं रही है. लेकिन इस बार उन्हें ईरान में खूब समर्थन मिल रहा है. उनके लिए नारे लग रहे हैं. उन्हें ईरानी प्रवासियों और कुछ सुधारवादी ईरानियों के बीच समर्थन प्राप्त है. वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं. दुनिया से ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए समर्थन की अपील करते हैं.

कई विशेषज्ञों के अनुसार उन्हें मिलने वाला समर्थन विवादास्पद है. उनका कहना है कि ईरान के अंदर क्रांति से पहले के जीवन को याद करने के लिए पर्याप्त बूढ़े नहीं हैं. कुछ आलोचक मानते हैं कि इजरायल के साथ उनके संबंध और विदेशी समर्थन हासिल करने के उनके प्रयास राजशाही की वापसी की योजना की वैधता को कमजोर करते हैं.

विदेश में रहने के दौरान रेजा पहलवी ने ईरान के प्रवासी समुदाय में एक बड़ा समर्थक वर्ग तैयार कर लिया है. इन समर्थकों का मानना है कि अगर सत्ता गिरती है तो पूर्व युवराज कार्यभार संभालने के लिए बिल्कुल उपयुक्त स्थिति में हैं.

कैसे ईरान पर काबिज हुआ पहलवी राजवंश

अपनी स्थापना के समय से ही पहलवी राजवंश विदेशी समर्थन पर निर्भर रहा है. जब रजा पहलवी के दादा रजा खान पहलवी ने 1921 में तेहरान पर अपनी सेना चढ़ाई तो उन्होंने ऐसा ब्रिटिश समर्थन से किया. इसके बाद रजा खान पहलवी ने 1925 से 1941 तक शासन किया. ब्रिटेन और सोवियत संघ ने ईरान पर आक्रमण कर उन्हें पदच्युत कर दिया.

उनके स्थान पर उनके पुत्र मोहम्मद पहलवी को सत्ता सौंपी. शुरुआत में नए शाह ने एक लोकतांत्रिक संसद के साथ मिलकर शासन किया. लेकिन संसद द्वारा ईरान के तेल का राष्ट्रीयकरण करने के बाद यूनाइटेड किंगडम ने एक बार फिर हस्तक्षेप किया, इस बार वॉशिंगटन की मदद से. मोहम्मद पहलवी, ब्रिटिश और अमेरिकी सेना ने मिलकर ईरान के प्रधानमंत्री को पद से हटा दिया. मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी ने 1941 से 1979 तक शासन किया. पहलवी राजवंश का अंत 1979 में हुई ईरानी क्रांति के साथ हुआ, जिसके बाद ईरान में इस्लामी गणतंत्र की स्थापना हुई.

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