पुरूष या महिलाएं, कौन होता है सबसे ज्यादा ओवरथिंकर? किसकी मेंटल हेल्थ होती है ज्यादा खराब

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आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना एक आम समस्या बनती जा रही है. छोटी-छोटी बातों को बार-बार सोचने से मानसिक तनाव और चिंता बढ़ सकती है.ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि पुरुष और महिलाओं में से कौन ज्यादा ओवरथिंक करता है और किसकी मेंटल हेल्थ पर इसका ज्यादा असर पड़ता है.

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ओवरथिंकिंग को लेकर कई रिसर्च और सर्वे में यह पाया गया है कि पुरुषों और महिलाओं के सोचने के तरीके में कुछ अंतर होता है. सबसे पहले अगर इसके प्रसार की बात करें, तो कई सर्वे बताते हैं कि महिलाओं में ओवरथिंकिंग की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है. एक सर्वे के अनुसार करीब 57 प्रतिशत महिलाएं खुद को ओवरथिंकर मानती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा लगभग 43 प्रतिशत के आसपास पाया गया.

ब्रिटिश साइट Graziadaily में छपी रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं अक्सर किसी समस्या या घटना के बारे में ज्यादा समय तक सोचती रहती हैं और बार-बार उसी पर विचार करती हैं. इस प्रक्रिया को मनोविज्ञान में रुमिनेशन (rumination) कहा जाता है. इसी वजह से कई बार महिलाओं में चिंता (एंग्जायटी) और अवसाद (डिप्रेशन) जैसी मानसिक समस्याओं का खतरा भी थोड़ा अधिक देखा जाता है.

सोचने और तनाव को संभालने के तरीके में भी पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर पाया गया है. कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार महिलाएं अक्सर अपने तनाव और भावनाओं को अंदर ही अंदर महसूस करती हैं और उन्हें गहराई से सोचती रहती हैं, जबकि पुरुष कई बार तनाव को अलग तरीके से व्यक्त करते हैं. पुरुषों में तनाव का असर कई बार व्यवहार, गुस्से या किसी गतिविधि के रूप में बाहर दिखाई देता है. इसे तनाव का एक्सटर्नलाइजेशन कहा जाता है. यही कारण है कि पुरुषों में ओवरथिंकिंग हमेशा साफ तौर पर दिखाई नहीं देती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे मानसिक दबाव महसूस नहीं करते. कई मामलों में पुरुष भी उतनी ही गहराई से सोचते हैं, बस उसका प्रदर्शन अलग तरीके से होता है.

दिमाग के काम करने के तरीके को लेकर भी कुछ वैज्ञानिक अध्ययन दिलचस्प जानकारी देते हैं. शोध के अनुसार महिलाओं के दिमाग में फ्रंटल कॉर्टेक्स (जो ध्यान और निर्णय से जुड़ा होता है) और लिंबिक सिस्टम (जो भावनाओं से संबंधित होता है) की गतिविधि कई परिस्थितियों में अधिक सक्रिय देखी गई है. यही वजह मानी जाती है कि महिलाएं कई बार किसी घटना, बातचीत या रिश्ते से जुड़ी बातों को ज्यादा गहराई से और लंबे समय तक सोचती रहती हैं. इस तरह की गहरी भावनात्मक प्रोसेसिंग कई बार ओवरथिंकिंग का रूप भी ले सकती है.

इसके अलावा उम्र का भी ओवरथिंकिंग से संबंध देखा गया है. कई अध्ययनों में पाया गया है कि 25 से 35 साल की उम्र के युवाओं में ओवरथिंकिंग सबसे ज्यादा देखने को मिलती है. इस उम्र में करियर, रिश्ते, आर्थिक स्थिति और भविष्य से जुड़ी कई चिंताएं दिमाग पर असर डालती हैं. हालांकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, लोगों का अनुभव भी बढ़ता है और वे कई चीजों को लेकर अधिक संतुलित सोच विकसित कर लेते हैं. इसी कारण उम्र बढ़ने के साथ ओवरथिंकिंग की प्रवृत्ति कई लोगों में धीरे-धीरे कम होती हुई भी देखी गई है, चाहे वह पुरुष हों या महिलाएं.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

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