डायबिटीज के किन मरीजों को लेना पड़ता है इंसुलिन, कब तक दवा करती है असर, डॉक्टर से जान लीजिए

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Diabetes Treatment Options: डायबिटीज के हर मरीज को इंसुलिन की जरूरत नहीं होती है. टाइप 2 डायबिटीज के जिन मरीजों में दवाएं काम करना बंद कर देती हैं, उन्हें इंसुलिन लेना पड़ता है. टाइप 1 में शुरू से ही इसकी जरूरत होती है.

डायबिटीज के किन मरीजों को लेना पड़ता है इंसुलिन, कब तक दवा करती है असरटाइप 1 डायबिटीज में शुरुआत से ही इंसुलिन की जरूरत पड़ती है.

Do You Need Insulin or Medicine: डायबिटीज एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल सामान्य से ज्यादा हो जाता है और इसे कंट्रोल करने के लिए ट्रीटमेंट कराना पड़ता है. आज के दौर में डायबिटीज महामारी की तरह फैल रही है और करोड़ों लोग इससे जूझ रहे हैं. डायबिटीज की बीमारी में शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन या तो कम बनता है या शरीर उसका सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता है. ऐसे में मरीजों को दवाएं दी जाती हैं या कुछ मामलों में इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है. कई लोगों को यह समझ नहीं आता कि आखिर किन मरीजों को इंसुलिन लेना जरूरी होता है और दवाएं कब तक असर करती हैं. चलिए इस बारे में डॉक्टर से जानने की कोशिश करते हैं.

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि डायबिटीज मुख्य तौर पर दो तरह की होती है, टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज. टाइप 1 डायबिटीज में शरीर में बेहद कम इंसुलिन बनता है या बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनता है. ऐसे मरीजों को शुरुआत से ही इंसुलिन लेना पड़ता है, ताकि शुगर लेवल कंट्रोल किया जा सके. टाइप 2 डायबिटीज में शरीर कुछ मात्रा में इंसुलिन बनाता है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं होता या शरीर उसे सही से उपयोग नहीं कर पाता है. इस स्थिति में शुरुआत में दवाओं से इलाज किया जाता है.

डॉक्टर रावत ने बताया कि टाइप 2 डायबिटीज वाले कई मरीज शुरुआत में ओरल एंटी डायबिटिक दवाओं से ठीक रहते हैं. हालांकि जब दवाएं ब्लड शुगर को कंट्रोल नहीं कर पाती हैं और HbA1c लगातार बढ़ा हुआ रहता है या मरीज को कोई कॉम्प्लिकेशन होने लगती है, तब उस कंडीशन में डॉक्टर इंसुलिन देना शुरू करते हैं. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज के दौरान भी इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है. कुछ मरीजों को कुछ महीनों के लिए इंसुलिन दिया जाता है, जब तक ब्लड शुगर कंट्रोल न हो जाए. वहीं कुछ मरीजों को लंबी अवधि या जीवनभर इंसुलिन लेना पड़ सकता है. इंसुलिन डोज डॉक्टर मरीज की कंडीशन के अनुसार तय करते हैं.

एक्सपर्ट की मानें तो डायबिटीज की दवाएं तब तक असर करती हैं, जब तक शरीर में इंसुलिन बनने की क्षमता कुछ हद तक बनी रहती है और मरीज अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करता है. अगर मरीज अनियमित खानपान, तनाव, वजन बढ़ना या अन्य लापरवाही करता है, तो दवाएं धीरे-धीरे असर करना बंद कर देती हैं. ऐसे में इंसुलिन की जरूरत हो सकती है. बहुत से मरीज इंसुलिन लेने से डरते हैं. उन्हें लगता है कि यह आखिरी स्टेज है या इसकी आदत लग जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है. इंसुलिन एक हार्मोन है, जिसे शरीर में इंजेक्ट करने से मरीज की स्थिति बेहतर होती है. समय पर इंसुलिन लेने से शरीर को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होता है और कॉम्प्लिकेशन से बचा जा सकता है.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय वर्तमान में News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में काम कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 9 वर्षों का अनुभव है. वे खासतौर पर हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों को गहराई से स…और पढ़ें

अमित उपाध्याय वर्तमान में News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में काम कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 9 वर्षों का अनुभव है. वे खासतौर पर हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों को गहराई से स… और पढ़ें

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डायबिटीज के किन मरीजों को लेना पड़ता है इंसुलिन, कब तक दवा करती है असर

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