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डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा एक मुकदमा भारत के लिए बड़ी राहत बन सकता है, क्या है पूरा मामला विस्तार से समझते हैं.
ट्रंप प्रशासन की ओर से 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए गए हैं. दरअसल यह कानून राष्ट्रपति को विदेशी संकटनों से निपटने के लिए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की शक्ति देता है, लेकिन इसमें स्पष्ट तौर पर टैरिफ का कहीं जिक्र नहीं है, इसीलिए ट्रंप के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठाया गया है.
कैसे फंसे ट्रंप ?
अब नवंबर में होगी बहस
फेडरनल सर्किट अपील कोर्ट से यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, दरअसल ट्रंप प्रशासन ने 3 सितंबर को 251-पेज की अपील दायर की, जिसमें कहा कि टैरिफ हटने से 750 अरब से 1 ट्रिलियन डॉलर का रिफंड देना पड़ सकता है. इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट से यह अपील की है कि सरकार ने जो भी टैरिफ लगाए हैं, उन्हें वैध ठहराया जाए. 9 सितंबर को इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया. कोर्ट ने इसकी सुनवाई तेजी से करने पर सहमति दे दी है. इस मामले में पहली सुनवाई नवंबर माह के पहले सप्ताह में होगी.
ट्रंप ने कैसे लगाए गए ये शुल्क?
ट्रंप के टैरिफ से भारत को कितना नुकसान?
भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका है, यहां भारत हर साल तकरीबन 80 डॉलर से ज्यादा का सामान बेचता है. हालांकि टैरिफ की वजह से टेक्सटाइल और ज्वेलरी का निर्यात 35 अरब डॉलर तक गिर सकता है, इसके अलावा दवाइयां और ऑटोपार्ट और रसायन महंगे होने के चांसेज भी हैं. भारतीय एक्सपर्ट इसे ट्रेड वॉर का हिस्सा बता रहे हैं
ट्रंप का हारना भारत के लिए अच्छा क्यों?
भारत को कैसे होगा फायदा?
अगर भारत से टैरिफ हट जाता है तो सामान सस्ता होगी, यानी की मांग बढ़ेगी, ऐसे में निर्यात में बढ़ोतरी हो सकती है, टेक्सटाइल, ज्वेलरी और इंजीनियरिंग उद्योगों को फायदा, नौकरियों पर खतरा कम हो जाएगा. अमेरिका के साथ घाटा कम, नई डील की गुंजाइश भी बढ़ जाएगी. अगर फैसला 2026 तक लंबा खिंचा, तो भारत को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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