15 या 16 मार्च! कब रखा जाएगा चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत? आचार्य से समझें

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15 या 16 मार्च! कब रखा जाएगा चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत? आचार्य से समझें

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March Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. आइए उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से जानते हैं इस बार जो चैत्र माह का पहला प्रदोष आ रहा है उसका धार्मिक महत्व क्या है.

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उज्जैन. हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है. प्रदोष व्रत के दिन भक्त सुबह से लेकर प्रदोष काल तक व्रत रखते हैं और भगवान शिव सहित उनके पूरे परिवार की पूजा-अर्चना करते हैं. पूजा के बाद विधिपूर्वक व्रत का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से कि मार्च का दूसरा और चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत कब पड़ रहा है.

कब रखा जाएगा चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्च 2026 में दूसरा प्रदोष व्रत 16 मार्च, सोमवार को है. 16 तारीख को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगी. इस तिथि का समापन 17 मार्च को सुबह 09 बजकर 24 मिनट पर होगा. ऐसे में व्रत 16 मार्च को ही रखा जाएगा. चूंकि सोमवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ेगी. इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा. 16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त शाम 06 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगा. ये शुभ मुहूर्त रात 08 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. इस समय महादेव की पूजा और मंत्र जाप करें.

सोम प्रदोष का क्या अर्थ?
सोमवार के दिन पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि को सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. यह व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत मनोकामनाएं पूर्ण करता है. ज्योतिष के अनुसार जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ प्रभाव दे रहा हो, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए. साथ ही कई लोग संतान सुख की कामना से भी सोम प्रदोष व्रत रखते हैं.

जरूर करें इन नियमों का पालन
– प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ देकर व्रत का संकल्प लें.
– इसके बाद पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें.
– इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेल पत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें.
– पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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