परिवार ने नहीं दिया साथ, तो खुद ही मुश्किलों का किया सामना, आज सुल्तानपुर में सोनी की चाय के कई दीवाने

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Sultanpur News: कहते हैं कि आगे बढ़ने का जज्बा हो तो मुश्किलें कितनी भी आ जाए, आगे बढ़ने वाले को कोई रोक नहीं सकता है. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सुल्तानपुर की उस महिला की, जिसने घर की रसोईं से निकलकर आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया और आज आत्मनिर्भर बन चुकी हैं.

सुल्तानपुर: अगर दिल में हौसला और जुनून हो तो कोई भी आदमी किसी भी काम को आसानी से कर सकता है. मन में दृढ़ संकल्प हो तो संसाधनों का अभाव सफलता में बाधक नहीं बनते हैं. कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सुल्तानपुर की उस महिला की, जिसने घर की रसोईं से निकलकर आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया और अपने पैरों पर खड़े होकर आय का स्रोत बनाने का काम किया है. इसकी चर्चा समाज में चारों तरफ हो रही है.

दरअसल हम बात कर रहे हैं सोनी जायसवाल की, जिन्होंने पढ़ाई तो मात्र आठवीं कक्षा तक की है, लेकिन उनके हौसले आसमान को छूने वाले थे और उन्होंने आय का स्रोत जनरेट किया और चाय की दुकान खोली, जिससे वह अच्छी कमाई कर रही हैं. सुल्तानपुर शहर में सोनी जायसवाल आज चर्चा का विषय बनी हुई हैं.

ऐसे बनी प्रेरणा स्रोत

लोकल 18 से बातचीत के दौरान सोनी बताती हैं कि उनके परिवार के लोगों ने उनका साथ नहीं दिया तो उन्होंने अपने पैरों पर खड़ा होने का सोचा और आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया. इसी वजह से उन्होंने दुकान खोलने का फैसला किया और फिर चाय की दुकान खोलकर अपने पैरों पर खड़ी हो गई है और आय का स्रोत भी जनरेट कर लिया है. सोनी के इस फैसले की चर्चा अब पूरे सुल्तानपुर में हो रही है और वह एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं.

पढ़ी कम, गढ़ी ज्यादा

अगर हम सोनी जायसवाल की शैक्षिक बैकग्राउंड के बारे में बात करें तो सोनी ने मात्र कक्षा आठवीं तक पढ़ाई की है, लेकिन उनके अंदर सीखने का हुनर काम करने का लक और आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ संकल्प ऐसा है कि उन्होंने पढ़ाई को अपने काम में बाधक नहीं बनने दिया, जिसकी वजह से उन्होंने चाय की दुकान खोली और आज वे महीने में अच्छी कमाई कर रही हैं. सुल्तानपुर के दीवानी न्यायालय के गेट नंबर 2 के ठीक सामने सोनी जायसवाल अपनी चाय की दुकान खोली है. इनकी चाय का स्वाद काफी फेमस है, जिसकी वजह से लोग आकर्षित होते हैं और दूर-दूर से लोग चाय पीने के लिए आते हैं.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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परिवार ने नहीं दिया साथ, तो इस महिला ने लिखी खुद की तकदीर, बनीं आत्मनिर्भर

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