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Type 2 Diabetes and Insulin: टाइप 2 डायबिटीज में जब दवाओं और लाइफस्टाइल से ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं होता, तब इंसुलिन की जरूरत पड़ती है. सही समय पर इंसुलिन शुरू करने से शुगर लेवल काबू में रहता है और गंभीर कॉम्प्लिकेशंस से बचाव होता है. हालांकि इंसुलिन हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद लेना चाहिए.
जब शुगर लेवल दवाओं से कंट्रोल नहीं होता, तब इंसुलिन लेने की सलाह दी जाती है.
Insulin for Type 2 Diabetes: टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को शुरुआत में दवा दी जाती है, ताकि ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल हो सके. अगर दवाओं के साथ खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार किया जाए, तो शुगर लेवल को लंबे समय तक मैनेज किया जा सकता है. समय के साथ टाइप 2 डायबिटीज के कुछ मरीजों को इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है. कई लोग इंसुलिन शुरू करने से डरते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सही समय पर इंसुलिन लेना शरीर को गंभीर कॉम्प्लिकेशन से बचा सकता है. अक्सर लोगों का सवाल होता है कि दवाएं खाने वाले डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन कब लेना चाहिए?
गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के एंडाक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल ने News18 को बताया कि जब ब्लड शुगर लेवल लंबे समय तक बहुत ज्यादा बना रहता है और दवाओं व लाइफस्टाइल में बदलाव के बावजूद कंट्रोल में नहीं आता, तब ऐसे मरीजों को इंसुलिन शुरू करने की सलाह देते हैं. अगर फास्टिंग शुगर और HbA1c लगातार बढ़ा हुआ हो, तो यह संकेत है कि शरीर को अतिरिक्त इंसुलिन की जरूरत है. इसके अलावा बीमारी के लंबे समय बाद पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने की क्षमता भी कम हो जाती है. ऐसी कंडीशन में भी इंसुलिन लेने का सुझाव दिया जाता है. कुल मिलाकर यह मरीज की कंडीशन पर डिपेंड करता है.
डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि इंसुलिन की डोज हर मरीज के लिए अलग होती है और इसे डॉक्टर ही तय करते हैं. कुछ लोगों को दिन में एक बार इंसुलिन दिया जाता है, जबकि कुछ को खाने से पहले इंसुलिन लेना पड़ता है. सही समय पर इंसुलिन लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ने या गिरने से बचता है. मरीज को अपने शुगर लेवल की नियमित जांच करते रहना चाहिए, ताकि डोज को समय-समय पर एडजस्ट किया जा सके.
एक्सपर्ट की मानें तो अक्सर लोग सोचते हैं कि इंसुलिन शुरू करने का मतलब बीमारी बहुत गंभीर हो गई है, लेकिन यह सही नहीं है. इंसुलिन एक सुरक्षित और असरदार ट्रीटमेंट है, जो शरीर को जरूरी हार्मोन प्रदान करता है. सही तरीके से लेने पर यह किडनी, आंखों और दिल से जुड़ी जटिलताओं को रोकने में मदद करता है. इसलिए इसे डर के बजाय एक जरूरी चिकित्सा विकल्प के रूप में देखना चाहिए. टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन की जरूरत हर मरीज को नहीं होती, लेकिन जब जरूरत हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इस बारे में किसी भी तरह की कंफ्यूजन होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें