जब घर में है संजीवनी.. तो फिर टेंशन ही क्या, 21 से अधिक रोगों का बाप है ये पौधा, जानें फायदे

बलिया: फिलहाल बरसात का मौसम चल रहा है, जिसमें कभी धूम, कभी छांव, कभी बारिश, कभी उमस भरी गर्मी तो कभी ठंडी हवा का बहना प्राकृतिक है. इससे एक तरफ जहां राहत मिलता है, तो वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है. खास तौर से यह दमा, अस्थमा, पुरानी खांसी और श्वसन तंत्र से जुड़े रोग गंभीर बन जाते हैं. ऐसे में एक पौधा आपके लिए संजीवनी समान साबित हो सकता है. जी हां हर घर में आसानी से मिलने वाले इस पौधें को तुलसी के नाम से जाना जाता है.

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया के अनुभवी (MD और पीएचडी इन मेडिसिन) चिकित्साधिकारी डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि तुलसी आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली औषधियों में से एक है, जिसे हरिप्रिया, विष्णुप्रिया, वृंदा और श्याम आदि नामों से भी जाना जाता है. आपको बताते चलें कि वैसे, तुलसी के पौधे का पूजन भी किया जाता है, इसे तुलसी माता कहा जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार, तुलसी एक औषधि के साथ आस्था का भी प्रतीक है. तुलसी न केवल इम्युनिटी पावर बढ़ाते हैं, अनेक रोगों को दूर करने में भी बेहद लाभकारी और गुणकारी है.

तुलसी का अगर नियमित और सही तरीके से सेवन किया जाए, तो श्वसन तंत्र की समस्या, अस्थमा, सूखी खांसी, कुक्कुर खांसी, गले की खराश जैसी कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. इसके अलावा, तुलसी सिर दर्द, कान दर्द, दांतों की समस्या, पेट दर्द, कब्ज, डायरिया, मूत्र जलन, पीलिया, त्वचा रोग, सफेद दाग, मलेरिया, टाइफाइड, दाद, खुजली जैसी गंभीर बीमारियों में भी लाभकारी है.

यहीं नहीं तुलसी के फायदे खत्म होते हैं, बल्कि साइनसाइटिस जैसी समस्या में तुलसी की मंजरी (फूल) बहुत कारीगर हैं. इसको मसलकर सूंघने से तुरंत आराम मिलता है. तुलसी का सेवन कई प्रकार से किया जा सकता है. इसकी पत्तियों का काढ़ा यानी चाय बनाकर पिया जा सकता हैं. इसको चूर्ण के रूप में या इसके स्वरस (रस) को पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से अद्भुत फायदे होते हैं. यदि श्वसन से जुड़ी समस्या ज्यादा हो, तो तुलसी के रस में शहद मिलाकर चाटने से राहत मिलता है.

हर औषधि का अपना अलग-अलग साइड इफेक्ट होता है, इसलिए बगैर आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लिए किसी भी औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए. वैसे तुलसी एक महत्वपूर्ण औषधि है, परंतु इसके पत्तों को दांतों को चबाकर कभी सेवन नहीं करना चाहिए. उम्र और बीमारी के हिसाब से सही डोज और सही तरीका एक्सपर्ट से जरूर पूछना चाहिए.

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