मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना में क्या था Bhopal का किरदार? भोपाल रियासत के विलीनीकरण के बाद कैसा था मंजर

MP Foundation Day: 1 नवंबर को मध्य प्रदेश अपना 69वां स्थापना दिवस मना रहा है. देश का दिल कहे जाने वाला मध्य प्रदेश ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से तो एक अलग पहचान रखता ही है. साथ ही यहां की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी काफी रोचक रही है. दरअसल, देश की आजादी के बाद राज्यों के पुनर्गठन को लेकर लंबी मशक्कत चली, जिसमें राज्यों के पुनर्गठन के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया.

आयोग के सामने तमाम तथ्य और सिफारिशों को रखने के लिए पंडित रविशंकर शुक्ल के नेतृत्व में महाकौशल के नेताओं ने एक बैठक की, जिसमें निर्णय लिया गया कि महाकौशल मध्य भारत भोपाल और विंध्य प्रदेश के क्षेत्रों को जोड़कर ऐसे प्रदेश की रचना की जाए, जो उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की तरह हो. इन तमाम सिफारिशों को आयोग के समक्ष रखने का जिम्मा दुर्ग के घनश्याम सिंह गुप्त और द्वारका प्रसाद मिश्र को सौंपा गया था.

बता दें, मध्य प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर बुंदेलखंड के चार जिलों के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन नेताओं में खींचतान चलती रही. इसमें झांसी, बांदा, हमीरपुर और जालौन जैसे जिले शामिल थे, जिन्हें दोनों ही प्रदेश के नेता अपने साथ रखना चाहते थे. इसके पीछे तर्क दिया गया था कि इससे बुंदेलखंड एक ही राज्य में आ जाएगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत इसके लिए तैयार नहीं थे.

बुंदेलखंड के जिलों को लेकर अटकी कहानी
पुनर्गठन के दौरान द्वारका प्रसाद मिश्र बुंदेलखंड को मध्य प्रदेश में शामिल करने के पक्ष में थे. उन्होंने आयोग के सदस्यों के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि बुंदेलखंड के 4 जिले मध्य प्रदेश में आ जाने से पूरा बुंदेलखंड एक ही राज्य में आ जाएगा. मगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत झांसी की ललितपुर तहसील के लोगों के चाहने पर भी हमें देना नहीं चाहते. इस पर आयोग के सदस्य डॉ एमके पणिक्कर इसके पक्ष में थे, लेकिन बाकी सदस्य ने इस पर अपनी सहमति नहीं दी, जिसके चलते यह जिले मध्यप्रदेश में शामिल नहीं हो सके.

राज्य का केंद्र समझ भोपाल को बनाया राजधानी
कहा जाता है कि मध्य प्रदेश के गठन में भोपाल की भूमिका महत्वपूर्ण थी. इसे 1 नवंबर 1956 को नवगठित मध्य प्रदेश की राजधानी चुना गया, जिसका मुख्य कारण भोपाल की भौगोलिक स्थिति थी. साथ ही यह राज्य के केंद्र में भी स्थित है. इसके अलावा उस समय के मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा और भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान की भी इसमें अहम भूमिका रही थी.

नवाबों की बड़ी-बड़ी इमारतें आई काम
वहीं, सबसे बड़ी बात यहां नवाबों की बड़ी-बड़ी इमारतें हैं, जो प्रशासनिक दफ्तर, कार्यालय, आवास जैसी जरूरतों को पूरा कर देंगी. साथ ही शहर में ढेर सारी जमीन खाली पड़ी थी, जिस पर डेवलपमेंट का कार्य किया जा सकता था. भोपाल को राजधानी बनाने के लिए नवाब भी जोर लगाया. इसके बाद अंत में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी घोषित कर दिया. बता दें, उस समय भोपाल जिला नहीं था, बाद में इसे जिले का दर्जा दिया गया.

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