जिसे समझा बेकार, वही बना व्यापार! थरुहट की महिलाओं ने जलकुंभी से बदली जिंदगी, दिल्ली-मुंबई तक डिमांड

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Success Story Of Tharuhat women of Pashchim Champaran: थरुहट क्षेत्र की महिलाएं कुछ ऐसा कर रही हैं, जिसकी प्रसिद्धि सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों तक हो फैल चुकी है. बगहा, रामनगर और हरनाटांड़ सहित अन्य कई ऐसे सुदूर क्षेत्र हैं. जहां जंगलों के समीप रहने वाली महिलाएं जंगलों से निकलने वाले वेस्ट से उपयोगी होम डेकोर की वस्तुओं का निर्माण कर रही हैं.

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पश्चिम चम्पारण: थरुहट क्षेत्र की महिलाएं कुछ ऐसा कर रही हैं, जिसकी प्रसिद्धि सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों तक हो फैल चुकी है. बगहा, रामनगर और हरनाटांड़ सहित अन्य कई ऐसे सुदूर क्षेत्र हैं. जहां जंगलों के समीप रहने वाली महिलाएं जंगलों से निकलने वाले वेस्ट से उपयोगी होम डेकोर की वस्तुओं का निर्माण कर रही हैं. मजे की बात यह है कि जलकुंभी, मूंज और कुछ अन्य प्रकार की घास से निर्मित इन वस्तुओं की डिमांड देश की राजधानी दिल्ली के साथ मुंबई और नॉर्थईस्ट के कुछ राज्यों तक से होने लगी हैं. इससे महिलाओं का आत्मबल इतना बढ़ा है कि अब वो इन प्रोडक्ट्स को बड़े स्तर पर तैयार करने की तैयारी में हैं.

जलकुंभी से तैयार कर रही हैं उपयोगी वस्तुएं
बताते चलें कि जिले के बगहा, हरनाटांड़ और रामनगर जैसे क्षेत्रों की थारू महिलाएं जलाशयों में उगने वाली जलकुंभी से घरेलू उपयोग में आने वाली कुछ बेहद ही शानदार वस्तुओं का निर्माण कर रही हैं. इन महिलाओं को एक साथ संगठित करने वाले थरुहट निवासी शुभम नीरज बताते हैं कि जलकुंभी से तैयार की जाने वाली इन वस्तुओं में टी कॉस्टर, पर्स, विभिन्न आकार के हैट्स, हॉट पॉट, टेबल क्लॉथ के साथ कुछ अन्य होम डेकोर की वस्तुएं शामिल हैं.

वेस्ट को किया बेस्ट में तब्दील
विशेषज्ञों का कहना है कि जलकुंभी को वेस्ट की तरह देखा जाता है. गिने चुने जगहों पर ही इन्हें उपयोग में लाया जाता है.
बिहार का पश्चिम चम्पारण जिला इस मामले में धनी है. यहां की महिलाओं ने जलकुंभी से उपयोगी वस्तुओं का निर्माण कर वेस्ट को बेस्ट में तब्दील करने का काम किया है. बकौल नीरज, रामनगर प्रखंड के नौरंगिया दोन की निर्मला देवी, रामनगर के नौतनवा गांव की कौशल्या देवी तथा हरनाटांड़ की अनीता देवी सहित करीब 40 महिलाएं इस कारोबार में शामिल हैं. वेस्ट से तैयार की गई वस्तुओं की बिक्री अच्छी कीमत पर होती है, जिससे इन सभी महिलाओं का परिवार चलता है.

प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके हैं चर्चा 
इन वस्तुओं को बनाने के लिए जलकुंभी को सुखाकर उससे हर दिन करीब 4 गमले, 6 टी कॉस्टर, 5 हैट्स तथा पांच पर्स तैयार कर लिए जाते हैं. जिनकी बिक्री देश के विभिन्न राज्यों में की जाती है. जहां तक बात कीमत की है, तो जलकुंभी से बने 6 सेट वाले टी कॉस्टर की कीमत 70 रुपए है. वहीं हैट्स और पॉट्स की कीमत 200 रुपए प्रति पीस है. वेस्ट से तैयार इन उपयोगी वस्तुओं और थरुहट की महिलाओं की कारीगरी का गुणगान प्रधानमंत्री मोदी तक कर चुके हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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जिसे समझा बेकार, वही बना व्यापार! थरुहट की महिलाओं ने जलकुंभी से बदली जिंदगी

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