केला या सेब? बच्‍चों की लंबाई और वजन बढ़ाने के लिए क्‍या खिलाएं रोज

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Banana Vs Apple For Kids Growth : हर माँ-बाप चाहते हैं कि उनका बच्चा फुर्तीला हो, उसकी लंबाई सही बढ़े और शरीर में कमजोरी न रहे. लेकिन सवाल यह है कि इन दोनों में से ‘सुपर ग्रोथ’ के लिए सबसे बेस्ट कौन सा है? क्या सिर्फ एक सेब रोज खिलाने से काम चल जाएगा या वजन बढ़ाने के लिए केले का सहारा लेना जरूरी है? आइए, इस उलझन को सुलझाते हैं.

Banana Apple Health Benefits: अक्सर जब हम बच्चों की सेहत की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले दो ही फलों का नाम आता है- केला और सेब. हर माँ-बाप चाहते हैं कि उनका बच्चा फुर्तीला हो, उसकी लंबाई सही बढ़े और शरीर में कमजोरी न रहे. लेकिन सवाल यह है कि इन दोनों में से ‘सुपर ग्रोथ’ के लिए सबसे बेस्ट कौन सा है? क्या सिर्फ एक सेब रोज खिलाने से काम चल जाएगा या वजन बढ़ाने के लिए केले का सहारा लेना जरूरी है? आइए, इस उलझन को सुलझाते हैं.

मसल्स और मजबूती के लिए केले का कमाल- USDA (United States Department of Agriculture) के मुताबिक, अगर बात बच्चों की हड्डियों को फौलाद जैसा मजबूत बनाने और तेजी से वजन बढ़ाने की हो, तो केला बाजी मार लेता है. केले में भरपूर मात्रा में पोटैशियम, विटामिन B6 और मैग्नीशियम होता है, जो बच्चों की मांसपेशियों के विकास के लिए बहुत जरूरी है. यह एक ‘एनर्जी बम’ की तरह काम करता है, जो खेल-कूद वाले बच्चों को तुरंत ताकत देता है. अगर आपका बच्चा दुबला-पतला है, तो उसे रोजाना दूध के साथ केला देना उसकी ग्रोथ में चमत्कारिक बदलाव ला सकता है.

इम्यूनिटी और दिमाग का पावरहाउस है सेब- दूसरी तरफ, ‘एन एप्पल ए डे कीप्स द डॉक्टर अवे’ वाली कहावत बिल्कुल सच है. हेल्‍थलाइन के मुताबिक, सेब बच्चों की इम्यूनिटी यानी रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ाने में नंबर वन है. इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और विटामिन C संक्रमण से बचाता है. हालांकि, सेब सीधे तौर पर वजन बढ़ाने में केले जितना असरदार नहीं है, लेकिन यह बच्चे के मानसिक विकास और खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने के लिए रामबाण माना जाता है.

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लंबाई बढ़ाने में दोनों फलों का अलग-अलग रोल- लंबाई बढ़ाने के मामले में भी इन दोनों फलों का अपना अलग महत्व है. बच्चों की हाइट काफी हद तक उनके खान-पान और शारीरिक सक्रियता पर निर्भर करती है. केले में मौजूद खनिज पदार्थ हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को बढ़ाते हैं, जो लंबाई बढ़ने के दौरान हड्डियों को मजबूती देते हैं. वहीं, सेब शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर मेटाबॉलिज्म तेज करता है, जिससे शरीर को अन्य पोषक तत्व बेहतर तरीके से मिलते हैं और विकास में मदद मिलती है.

एनर्जी और रिकवरी का बैलेंस- विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को ‘फौलाद’ बनाने के लिए किसी एक फल पर निर्भर रहने के बजाय दोनों का संतुलन जरूरी है. केला जहाँ शरीर को ‘बल्क’ और एनर्जी देता है, वहीं सेब शरीर को अंदर से साफ और बीमारियों से मुक्त रखता है. अगर आपका बच्चा बहुत एक्टिव है और खूब दौड़-भाग करता है, तो उसके नाश्ते में केला शामिल करना सबसे बेहतर है ताकि उसे जरूरी कैलोरीज मिल सकें.

पाचन तंत्र के लिए कौन सा फल है आसान? पाचन के लिहाज से देखें तो छोटे बच्चों के लिए केला ज्यादा आसान होता है. इसे मैश करके आसानी से खिलाया जा सकता है. लेकिन ध्यान रहे कि कब्ज की समस्या होने पर पका हुआ केला ही दें. वहीं, सेब को छिलके के साथ या हल्का उबालकर (Applesauce) देने से बच्चों को भरपूर फाइबर मिलता है, जिससे उनका पेट साफ रहता है और भूख भी अच्छी लगती है. सही पाचन ही बेहतर शारीरिक विकास की पहली सीढ़ी है.

कब और कैसे खिलाएं? जानें सही समय- अब सवाल उठता है कि रोज क्या खिलाएं? बेस्ट तरीका यह है कि आप फलों को समय के अनुसार बांट दें. सुबह के समय या स्कूल जाने से पहले केला देना सबसे अच्छा है क्योंकि यह दिनभर के लिए ऊर्जा देता है. दोपहर के समय या शाम के स्नैक में सेब देना फायदेमंद होता है. इस तरह बच्चे को विटामिन, मिनरल्स और फाइबर का सही कॉम्बो मिल जाता है, जो उसकी लंबाई और वजन दोनों पर सकारात्मक असर डालता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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