गर्मियों में क्या पिएं और क्या खाएं ताकि न हो डिहाइड्रेशन? एक्सपर्ट से जानिए टिप्स

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Heat Stroke Prevention Tips: आज के दौर में बढ़ता तापमान और चिलचिलाती धूप सेहत के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं. गर्मी में पसीने के जरिए शरीर से सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं. इससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है. सही समय पर पानी और ओआरएस का इस्तेमाल न किया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. आइए जानते हैं डिहाइड्रेशन के लक्षण और उससे बचने के वो तरीके, जो आपको इस गर्मी में सुरक्षित रखेंगे.

अलीगढ़: पूरे उत्तर प्रदेश में सूरज की तपिश और बढ़ता तापमान अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है. गर्मी के इस मौसम में डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है. तेज धूप के संपर्क में आने से शरीर का तापमान अनियंत्रित हो जाता है, जिससे न केवल पानी बल्कि शरीर के लिए जरूरी लवण भी तेजी से कम होने लगते हैं. अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने इस स्थिति को लेकर अलर्ट जारी किया है और बचाव के सटीक उपाय साझा किए हैं.

क्यों खतरनाक है गर्मियों की ये धूप
अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ फार्माकोलॉजी के हेड, प्रोफेसर सैयद ज़िया उर रहमान के अनुसार, डिहाइड्रेशन का सबसे बड़ा कारण शरीर से अत्यधिक पसीना निकलना है. ऊंचे तापमान की वजह से जब पसीना निकलता है, तो वह अपने साथ शरीर के जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर ले जाता है. इससे शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ जाता है. यदि समय रहते इस कमी को पूरा न किया जाए, तो यह स्थिति शरीर के अंगों की कार्यक्षमता को प्रभावित करने लगती है.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
प्रोफेसर रहमान ने बताया कि डिहाइड्रेशन होने पर शरीर कई तरह के संकेत देता है जिन्हें पहचानना बेहद जरूरी है. अगर आपको अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही है, हल्का बुखार आ रहा है, चक्कर आ रहे हैं या फिर उल्टी और दस्त की शिकायत है, तो समझ लीजिए कि आपका शरीर पानी की भारी कमी से जूझ रहा है. ऐसी स्थिति में तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि गंभीर डिहाइड्रेशन होने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कर आईवी फ्लूइड (ड्रिप) चढ़ाने तक की नौबत आ सकती है.

ओआरएस है सबसे कारगर इलाज
विशेषज्ञों ने ओआरएस (ORS) यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट को डिहाइड्रेशन के इलाज के लिए “गोल्ड स्टैंडर्ड” करार दिया है. इसका इस्तेमाल करते समय एक खास सावधानी बरतनी चाहिए कि ओआरएस का घोल एक लीटर पानी में तैयार करने के बाद उसे 24 घंटे के भीतर ही खत्म कर देना चाहिए. यदि 24 घंटे बाद भी घोल बच जाए, तो उसे फेंक कर नया घोल बनाना ही सेहत के लिए सही है. हल्के लक्षणों में एंटीबायोटिक दवाओं के बजाय पर्याप्त तरल पदार्थ और ओआरएस ही सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है.

खान-पान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी
गर्मी से बचने के लिए सबसे प्राथमिक उपाय यही है कि जितना संभव हो धूप में निकलने से बचें. यदि बाहर जाना मजबूरी हो, तो अपने साथ पानी या शिकंजी जरूर रखें. खान-पान में रसीले फलों जैसे तरबूज और खरबूजे को शामिल करना बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा नींबू पानी और शिकंजी का नियमित सेवन शरीर में नमक और पानी की कमी को पूरा करता रहता है. समय रहते बरती गई ये छोटी-छोटी सावधानियां आपको किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी से बचा सकती हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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