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Traumatic Asphyxia Symptoms: ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया एक इमरजेंसी कंडीशन होती है, जिसमें लोगों की छाती पर दबाव बढ़ जाता है और सांस रुकने लगती है. अक्सर रोड एक्सीडेंट, भगदड़ और भीड़भाड़ वाली जगहों पर ऐसी कंडीशन पैदा हो जाती है, जिसके कारण लोगों की मौत हो जाती है. दिल्ली के जनकपुरी हादसे में भी इसी की आशंका जताई जा रही है.
ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया की कंडीशन में लोगों का दम घुट जाता है.
Traumatic Asphyxia Explained: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में पिछले सप्ताह दर्दनाक हादसा हुआ था. एक 25 साल का युवक अपनी बाइक से ऑफिस के बाद घर लौट रहा था, तभी वह दिल्ली जल बोर्ड के खोदे गए गड्ढे में बाइक समेत गिर गया. रातभर वह गड्ढे में पड़ा रहा और उसकी मौत हो गई. फिलहाल इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि छाती पर भारी दबाव के कारण उसे ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया हो गया होगा, जिससे उसकी मौत हो गई. गड्ढे की मिट्टी से उसका मुंह और नाक बंद हो गई, जिससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई.
सूत्रों के मुताबिक पोस्टमॉर्टम में शव की दाहिनी जांघ पर जलने के निशान मिले हैं. शायद मौत के बाद बाइक के साइलेंसर के साथ लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण ऐसा हुआ होगा. डॉक्टर्स की मानें तो जब वह युवक गड्ढे में गिरा होगा, तो वह बेहोश हो गया होगा. इसकी वजह से उसके मुंह और नाक में मिट्टी भर गई होगी और इसकी वजह से दम घुट गया होगा. हालांकि मौत की वजह का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही साफ हो पाएगा. यह जानकारी सामने आने के बाद ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया शब्द चर्चा में आ गया है. अब सवाल है कि ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया क्या है और इससे कैसे मौत हो जाती है?
क्या है ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया?
यूपी के लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है. जब किसी किसी व्यक्ति के सीने या पेट पर अचानक बहुत ज्यादा दबाव पड़ जाता है, तो इससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है. रोड एक्सीडेंट, भगदड़ में कुचलने और बहुत भारी चीजों के नीचे दबने जैसी घटनाओं में यह कंडीशन देखी जाती है. समय पर इलाज न मिलने पर यह कंडीशन जानलेवा हो सकती है. ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया में सीने पर तेज दबाव पड़ने से फेफड़े ठीक से फैल नहीं पाते और ऑक्सीजन शरीर तक नहीं पहुंच पाती है. छाती और गर्दन की नसों में दबाव बढ़ जाता है, जिससे खून का प्रवाह असामान्य हो जाता है. कई मामलों में मरीज बेहोश हो जाता है.
ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया में कैसे बच सकती है जान?
डॉक्टर ने बताया कि ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया की कंडीशन किसी भी व्यक्ति के साथ हो सकती है, लेकिन कमजोर फेफड़ों या पहले से सांस की बीमारी वाले लोगों में इससे मौत का खतरा ज्यादा होता है. इस कंडीशन का इलाज इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट पर निर्भर करता है. सबसे पहले व्यक्ति के शरीर से दबाव को हटाना चाहिए और मरीज को तुरंत खुली हवा में लाना जरूरी होता है. इसके बाद ऑक्सीजन देना, सांस की निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जाता है. डॉक्टर यह भी जांच करते हैं कि फेफड़ों, दिल या दिमाग को कोई गंभीर चोट तो नहीं पहुंची है. अगर कोई इंजरी होती है, तो उसका भी ट्रीटमेंट किया जाता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें