आजकल बढ़ती उम्र में ढीली त्वचा, झुर्रियां और चेहरे की चमक कम होना सबसे बड़ी चिंता बन गई है. इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में कॉलेजन का धीरे-धीरे कम होना है. 25 साल की उम्र के बाद शरीर का नेचुरल कॉलेजन हर साल घटने लगता है, जिसका असर सीधे स्किन, बाल और जोड़ों पर दिखता है. ऐसे में लोग कॉलेजन सप्लीमेंट्स का सहारा लेने लगे हैं, लेकिन सवाल यह है कि हर कॉलेजन सप्लीमेंट असरदार नहीं होता. अगर सही चीजें उसमें शामिल न हों, तो पैसा खर्च करने के बावजूद रिजल्ट नहीं मिलता. इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि एक अच्छे कॉलेजन सप्लीमेंट में क्या-क्या होना चाहिए, ताकि बढ़ती उम्र में भी चेहरा टाइट और जवां नजर आए.
हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले बात करते हैं कॉलेजन के प्रकार की. बाजार में मिलने वाले ज्यादातर सप्लीमेंट्स में हाइड्रोलाइज्ड कॉलेजन या कोलेजन पेप्टाइड्स होते हैं. यही सबसे बेहतर माने जाते हैं, क्योंकि ये छोटे अणुओं में टूटे होते हैं और शरीर इन्हें आसानी से अब्सॉर्ब कर लेता है. स्किन के लिए खासतौर पर टाइप-1 और टाइप-3 कॉलेजन जरूरी होता है, क्योंकि यही त्वचा की मजबूती, इलास्टिसिटी और स्मूदनेस बनाए रखते हैं. अगर सप्लीमेंट में इन दोनों का जिक्र साफ तौर पर नहीं है, तो उससे ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
कॉलेजन अपने आप में तभी असर दिखाता है, जब उसके साथ विटामिन C मौजूद हो. विटामिन C के बिना शरीर नया कॉलेजन बना ही नहीं सकता. इसलिए अच्छा कॉलेजन सप्लीमेंट वही होता है, जिसमें विटामिन C या आंवला, रोजहिप, साइट्रस एक्सट्रैक्ट जैसे नेचुरल सोर्स शामिल हों. इससे त्वचा की रिपेयरिंग तेज होती है और झुर्रियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. अगर कोई सप्लीमेंट सिर्फ कॉलेजन का दावा करता है लेकिन विटामिन C नहीं देता, तो उसका असर सीमित रह जाता है.
कॉलेजन सप्लीमेंट्स के लिए जरूरी यह
इसके अलावा हायल्यूरोनिक एसिड भी एक जरूरी घटक है. यह स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखता है और चेहरे को भरा-भरा लुक देता है. बढ़ती उम्र में जब त्वचा ड्राई होने लगती है, तब हायल्यूरोनिक एसिड झुर्रियों को उभरने से रोकने में मदद करता है. वहीं बायोटिन और जिंक जैसे मिनरल्स स्किन के साथ-साथ बालों और नाखूनों को भी मजबूत बनाते हैं. अगर सप्लीमेंट में ये तत्व मौजूद हों, तो यह एक ऑल-इन-वन एंटी-एजिंग सपोर्ट बन जाता है.
कॉलेजन सप्लीमेंट में नहीं होनी चाहिए यह
एक अच्छी बात यह भी है कि कॉलेजन सप्लीमेंट में शुगर, आर्टिफिशियल फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव्स कम से कम हों. ज्यादा मीठे फ्लेवर वाले ड्रिंक्स अक्सर नुकसान पहुंचा सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो वजन या ब्लड शुगर को लेकर सतर्क रहते हैं. बेहतर है कि आप क्लीन लेबल वाला सप्लीमेंट चुनें, जिसमें इंग्रेडिएंट्स साफ-साफ लिखे हों और अनावश्यक चीजें न हों.
कॉलेजन सप्लीमेंट लेने का सही तरीका
आखिर में यह समझना जरूरी है कि कॉलेजन सप्लीमेंट कोई जादू नहीं है. इसका असर तभी दिखता है जब आप इसे नियमित रूप से, सही डोज में और हेल्दी डाइट के साथ लेते हैं. साथ ही अच्छी नींद, पानी का सही सेवन और धूप से बचाव भी उतना ही जरूरी है. अगर सही कॉलेजन सप्लीमेंट चुना जाए और सही लाइफस्टाइल अपनाई जाए, तो उम्र चाहे 50 या 60 ही क्यों न हो, चेहरा लंबे समय तक टाइट, ग्लोइंग और जवां नजर आ सकता है.