मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाए तो कौन सी परेशानियां हो सकती हैं? मेटाबॉलिक रेट कैसे करें बूस्ट

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Signs of a Sluggish Metabolism: मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर की वह प्रक्रिया है, जो खाने को एनर्जी में बदलती है. जब यह प्रोसेस सुस्त हो जाती है, तब वजन बढ़ना, थकान, बालों का झड़ना और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो बेहतर डाइट, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त नींद और पर्याप्त पानी पीने से मेटाबॉलिक रेट बूस्ट हो सकता है.

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मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने के लिए रोज एक्सरसाइज करनी चाहिए.

Hidden Impact of Slow Metabolism: अक्सर कहा जाता है कि अगर आपका मेटाबॉलिज्म तेज है, तो सेहत अच्छी बनी रहेगी. अगर मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाए, तो कई समस्याएं पैदा होने लगेंगी. अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर मेटाबॉलिज्म क्या है और यह स्लो हो जाए, तो इससे शरीर पर क्या असर हो सकता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो हमारे शरीर में खाने को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को मेटाबॉलिज्म कहा जाता है. शरीर को हर वक्त एनर्जी की जरूरत होती है और इसका मेटाबॉलिज्म से सीधा कनेक्शन है. यही वजह है कि डॉक्टर्स मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के तरीके बताते हैं.

लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि जब किसी व्यक्ति का मेटाबॉलिक रेट धीमा हो जाता है, तो शरीर कैलोरी को जलाने के बजाय उसे फैट के रूप में जमा करना शुरू कर देता है. धीमा मेटाबॉलिज्म केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे एनर्जी लेवल और फिजिकल व मेंटल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करता है. मेटाबॉलिज्म सुस्त होने का सबसे बड़ा लक्षण बिना वजह वजन बढ़ना या बहुत कोशिशों के बाद भी वजन कम न होना है. इसके अलावा व्यक्ति को हर समय थकान और कमजोरी महसूस होती है, क्योंकि शरीर पर्याप्त एनर्जी का उत्पादन नहीं कर पाता है.

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एक्सपर्ट ने बताया कि स्लो मेटाबॉलिज्म के कारण त्वचा में ड्राइनेस, बालों का झड़ना और पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज की शिकायत हो जाती है. यह स्थिति शरीर की आंतरिक गर्मी उत्पादन क्षमता को भी कम कर देती है, जिससे व्यक्ति को सामान्य से ज्यादा ठंड महसूस होने लगती है. धीमा मेटाबॉलिक रेट हमारे हार्मोन्स के साथ मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करता है. इसके कारण अक्सर ब्रेन फॉग की स्थिति पैदा होती है, जिसमें व्यक्ति को फोकस करने में कठिनाई होती है. मेटाबॉलिज्म धीमा होने से स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जो व्यक्ति को चिड़चिड़ा और उदास बना सकता है. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह थायराइड जैसी गंभीर समस्याओं या इंसुलिन रेजिस्टेंस की ओर ले जा सकता है, जो डायबिटीज का कारण बनता है.

अब सवाल है कि मेटाबॉलिज्म को तेज करने के लिए क्या करें? डॉक्टर के मुताबिक मेटाबॉलिज्म को तेज करने के लिए डाइट में बदलाव करें और हेल्दी फूड्स खाएं. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है. शरीर में पानी की हल्की सी कमी भी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर सकती है. एक्सरसाइज मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने का एक शक्तिशाली टूल है. मसल्स के टिश्यूज फैट वाले ऊतकों की तुलना में आराम की स्थिति में भी ज्यादा कैलोरी जलाते हैं. आपके शरीर में जितनी अधिक मांसपेशियां होंगी, आपका रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट उतना ही अधिक होगा. इसके अलावा हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग करने से आफ्टरबर्न इफेक्ट पैदा होता है, जिससे एक्सरसाइज खत्म करने के कई घंटों बाद तक शरीर कैलोरी जलाता रहता है.

अक्सर लोग मेटाबॉलिज्म के लिए केवल डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान देते हैं, लेकिन अधूरी नींद एक बड़ा विलेन साबित हो सकती है. नींद की कमी ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाती है और भूख को नियंत्रित करने वाले घ्रेलिन और लेप्टिन हार्मोन्स को असंतुलित कर देती है, जिससे मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है. हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद शरीर को रिपेयर करने और मेटाबॉलिक फंक्शन को सुचारू रखने के लिए जरूरी है. सही पोषण, नियमित व्यायाम और तनाव मुक्त जीवन के जरिए आप अपने मेटाबॉलिक रेट को फिर से सक्रिय कर सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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