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Type 1 diabetes : बच्चों की शुगर जांच समय-समय पर जरूर कराएं, खासकर तब जब उनमें कोई असामान्य लक्षण नजर आएं. विदेशों में जागरूकता के कारण टाइप-1 मरीज बच्चों की जान समय रहते बचाई जा रही है. भारत में भी यही तरीका अपनाने की जरूरत है. टाइप-1 डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है.
कानपुर. देश के कोलकाता, केरल, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान जैसे कई राज्यों में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यूपी में भी इसके लाखों मरीज हैं. स्थिति को गंभीर होते देख केंद्र सरकार अब इन बच्चों को मुफ्त इंसुलिन और शुगर नापने वाली स्ट्रिप्स उपलब्ध करा रही है, ताकि बीमारी अनियंत्रित न हो. ये जानकारी ऑस्ट्रेलिया से आए विशेषज्ञ डॉ. ग्राहम ओग्ले ने कानपुर में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान दी. यह कार्यक्रम सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन एंड अवेयरनेस ऑफ डायबिटीज की ओर से आयोजित किया गया था.
डॉ. ओग्ले ने बताया कि भारत में 8 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के मामले सबसे अधिक मिल रहे हैं. ये आयु वर्ग सबसे संवेदनशील है क्योंकि कई अभिभावक शुरुआती लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते. बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, वजन घटना और कमजोरी जैसी दिक्कतों को अक्सर सामान्य समझकर अनदेखा कर दिया जाता है, जिससे बीमारी बढ़ती जाती है.
ये काम अभी बाकी
डॉ. ओग्ले ने कहा कि टाइप-1 डायबिटीज में बच्चे का शरीर इंसुलिन बनाना पूरी तरह बंद कर देता है. ऐसे में रोजाना इंसुलिन लेना ही एकमात्र उपाय बचता है. कई गरीब परिवार इसके खर्च को नहीं उठा पाते, इसलिए सरकार की तरफ से इंसुलिन और ग्लूकोज स्ट्रिप्स मिलना बच्चों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है. विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार की योजना अच्छी है, लेकिन इसकी रफ्तार अभी भी धीमी है. कई राज्यों में आवश्यक सामग्री समय से पहुंच नहीं पा रही, जिससे इलाज बीच में रुक जाता है और बच्चे खतरे में आ जाते हैं. डॉ. ओग्ले ने बताया कि अगर इंसुलिन समय से न मिले, तो बच्चों की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है, इसलिए वितरण व्यवस्था को और तेज व सरल बनाना बेहद जरूरी है.
यही एक रास्ता
डॉ. ओग्ले के मुताबिक, उनकी संस्था लाइफ फॉर चाइल्ड भारत सहित कई देशों में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को सहायता प्रदान करती है. उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बच्चे की जान सिर्फ इसलिए न जाए क्योंकि उसके परिवार के पास इलाज कराने के पैसे नहीं हैं. टाइप-1 डायबिटीज का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर जांच और नियमित इंसुलिन से बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं. अगर अभिभावक बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें, तो इस गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें