रिपोर्ट- प्रीत शर्मा
Mandsaur Onion Protest: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के धमनार गांव में आज एक अनोखा वाला दृश्य देखने को मिला. भाव नहीं मिलने से तंग आ चुके किसानों ने अपनी फसल प्याज की “अंतिम यात्रा” निकालकर सरकार और व्यवस्था के खिलाफ जबरदस्त विरोध जताया. बैंड-बाजे, नारे और ढोल-नगाड़ों के साथ सजी प्याज की अर्थी को कंधा देते हुए सैकड़ों ग्रामीण श्मशान घाट तक पहुंचे, जहां प्याज को “मुखाग्नि” देकर किसानों ने अपनी पीड़ा को प्रतीकात्मक तरीके से व्यक्त किया.
यह कोई साधारण प्रदर्शन नहीं था. यह उन हजारों किसानों की चीख थी जो महीनों की मेहनत के बाद भी अपनी उपज का उचित दाम नहीं पा रहे. मंदसौर, मालवा क्षेत्र का प्याज उत्पादन का बड़ा केंद्र माना जाता है. इस बार भी किसानों ने उम्मीद के साथ खेतों में प्याज बोया था, लेकिन मंडी में पहुंचते ही उनके सपने चकनाचूर हो गए. जहां लागत मूल्य 15-20 रुपए किलो तक आ रहा है, वहीं मंडी में प्याज 2 से 8 रुपए किलो तक बिक रहा है. कई किसानों को तो 1-2 रुपए किलो से ज्यादा भाव भी नहीं मिला. नतीजा यह हुआ कि ट्रकों में भरकर लाई गई प्याज सड़कों पर फेंकनी पड़ी या फिर जानवरों के चारे में डालनी पड़ी.
इसी दर्द को व्यक्त करने के लिए धमनार गांव के किसानों ने आज प्याज को “मृत” घोषित कर दिया. सुबह से ही गांव में तैयारी शुरू हो गई थी. लकड़ी की एक छोटी अर्थी सजाई गई, उस पर चुनिंदा बड़े-बड़े प्याज रखे गए. अर्थी को फूल-मालाओं से सजाया गया, ठीक वैसे ही जैसे किसी अपने की अंतिम यात्रा में सजाया जाता है. आगे-आगे बैंड-बाजा बज रहा था, लोग “प्याज अमर रहे”, “किसान को न्याय दो”, “सरकार होश में आओ” जैसे नारे लगा रहे थे. महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, सभी शामिल थे. कोई रो रहा था, कोई गुस्से में चिल्ला रहा था.
अर्थी जैसे ही श्मशान घाट पहुंची, वहां चिता सजाई गई. प्याज को चिता पर रखकर किसानों ने उसे मुखाग्नि दी. धुएं के गुबार के साथ किसानों की आंखों से आंसू भी बह रहे थे. एक किसान भावुक होकर बोले, “हमने इसे अपने बच्चे की तरह पाला, रात-दिन खेतों में मेहनत की, लेकिन सरकार और व्यापारियों ने इसे मार डाला. आज हम अपनी फसल को मुक्ति दे रहे हैं.” यह प्रदर्शन सिर्फ धमनार गांव तक सीमित नहीं रहा. सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और मंदसौर, नीमच, रतलाम सहित पूरे मालवा-निमाड़ के किसान इस विरोध में साथ देने की बात कर रहे हैं. किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्दी ही प्याज का उचित मूल्य सुनिश्चित नहीं किया गया तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल जाएगा.
किसानों की मांग साफ है – प्याज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाए, मंडी में सही भाव मिले, और बिचौलियों पर लगाम लगे. क्या सरकार इस “प्याज की चिता” से जागेगी? यह सवाल अब पूरे मध्य प्रदेश में गूंज रहा है.
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