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अगर आप एनीमिया जैसी समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं, तो शीशम की पत्तियां और उसका तेल आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं. शीशम की पत्तियां एनीमिया को जड़ से ठीक करने में मदद करती हैं. साथ ही, पेट के अल्सर की समस्या से ग्रस्त लोगों के लिए शीशम के बीज बेहद उपयोगी हैं, क्योंकि ये पेट में होने वाले अल्सर को कम करने में मदद करते हैं.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में शीशम के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. किसान अपने खेतों के चारों ओर भी शीशम के पेड़ लगाते हैं, जिससे उन्हें अच्छा खासा आर्थिक लाभ मिलता है. वहीं, शीशम का पौधा स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसकी पत्तियां और छाल कई तरह से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती हैं, जिससे इसकी मांग हमेशा अधिक रहती है.

अगर आप एनीमिया जैसी समस्या से परेशान रहते हैं, तो शीशम की पत्तियां और उसका तेल आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं. शीशम की पत्तियां एनीमिया को जड़ से ठीक करने में मदद करती हैं. इसके अलावा, जो लोग पेट के अल्सर से परेशान हैं, उनके लिए शीशम के बीज बेहद लाभकारी हैं, क्योंकि ये पेट में होने वाले अल्सर की समस्या को कम करने में मदद करते हैं.

आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार के अनुसार, आप शीशम की पत्तियों का चूर्ण भी तैयार कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले शीशम की पत्तियों को लेकर साफ पानी में धो लें और फिर धूप में सुखाएं. जब पत्तियां पूरी तरह सूख जाएं, तो उन्हें बारीक पीस लें. इसके बाद इसमें काला नमक मिलाकर तैयार चूर्ण को सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ सेवन करें. इससे कई तरह की बीमारियों में राहत मिल सकती है और स्वास्थ्य में सुधार होता है.
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सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में स्क्रीन पर खुजली की समस्या आम है, जिससे लोग अक्सर परेशान रहते हैं. अगर आप भी खुजली से परेशान हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो शीशम के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. शीशम का तेल सीधे खुजली वाले स्थान पर लगाने से जलन कम होती है और धीरे-धीरे खुजली भी समाप्त हो जाती है.

सर्दियों में हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन हृदय रोग से ग्रसित मरीजों के लिए शीशम का तेल बहुत उपयोगी माना जाता है. शीशम का तेल सेवन करने से रक्त प्रवाह बेहतर रहता है और यह डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं में भी राहत प्रदान कर सकता है. इसके अलावा, शीशम की पत्तियों को कचनार की पत्तियों और जौ के साथ मिलाकर तैयार काढ़ा पीने से टीवी (टेलीविजन देखने से आंखों पर असर) और आंखों की अन्य समस्याओं में भी फायदा मिलता है.

कुष्ठ रोगियों के लिए भी शीशम की छाल बहुत फायदेमंद मानी जाती है. इसके लिए आप शीशम की छाल को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार कर सकते हैं और इसे सुबह-शाम रोगियों को पिला सकते हैं. सबसे पहले शीशम की छाल को अच्छी तरह धो लें, फिर इसे गर्म पानी में उबालकर काढ़ा बना लें. इसमें आवश्यकतानुसार दो चम्मच शहद भी मिला सकते हैं. इस काढ़े का नियमित सेवन कुष्ठ रोग के उपचार में मदद कर सकता है और लाभ पहुंचा सकता है.

अगर आपके दांतों में अक्सर दर्द रहता है, तो शीशम की दातुन आपके लिए फायदेमंद हो सकती है. आयुर्वेद में शीशम के पेड़ की दातुन को बहुत महत्व दिया गया है और आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. शीशम की दातुन से न केवल दांत के दर्द में राहत मिलती है, बल्कि मुंह की बदबू भी कम होती है, जिससे दांत और मसूड़ों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है.