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Ayurvedic treatment for ulcer: पेट में जब एसिड ज्यादा बनता है तब आतों की दीवारों में घाव होने लगता है. इसे अल्सर कहा जाता है. आजकल यह बीमारी आम हो गई है. लेकिन आयुर्वेद में इसका बेहद शानदार इलाज है.

कैसे बनता है अल्सर
एक्सपर्ट की मानें तो पेट का अल्सर अचानक नहीं होता बल्कि इसकी जड़ें व्यक्ति की आम जीवनशैली में छुपी होती हैं. लगातार खाली पेट रहना, बार-बार चाय या कॉफी पीना, बहुत मसालेदार, बासी या अनियमित भोजन करना, देर रात तक जागना और तनाव में रहना, ये सब वजहें पेट की सेहत पर सीधा वार करती हैं. जब लगातार ऐसे कारणों से पेट में एसिड बनता है और शरीर की पाचन क्रिया कमजोर होती है तो पेट की संवेदनशील परत पर असर पड़ता है. धीरे-धीरे यह परत कमजोर होकर उसमें घाव या छाले यानी अल्सर बनने लगते हैं.
आयुर्वेद में अल्सर के कारण
घरेलू उपाय से ठीक होगी अल्सर
आयुर्वेद में अल्सर से राहत पाने के लिए कई आसान घरेलू उपाय सुझाए गए हैं, जिनका कोई दुष्प्रभाव नहीं है. इनमें सबसे प्रभावी है मुलेठी का चूर्ण, जिसे दूध या गर्म पानी में मिलाकर लेना चाहिए. यह पेट की झिल्ली को शीतलता और राहत देता है. शुद्ध देसी घी न सिर्फ पाचन को सुधारता है बल्कि पित्त को ठंडा करता है और घाव भरने में भी मदद करता है. एलोवेरा जूस, आंवला, नारियल पानी और धनिया-सौंफ का पानी पेट में ठंडक लाते हैं और पाचनतंत्र को मजबूत बनाते हैं. शतावरी चूर्ण भी फायदे का सौदा है जो पेट की सुरक्षा करता है. इन आसान उपायों को अपनाकर और जीवनशैली में थोड़ा बदलवाव लाकर पेट के अल्सर जैसी गंभीर बीमारी से न सिर्फ राहत पाई जा सकती है बल्कि खुद को दोबारा सेहतमंद भी बनाया जा सकता है. इनपुट-आईएनएएस
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