एक्सप्रेस-वे और हाईवे में क्या होता है अंतर ? एक्सपर्ट से जाने

जबलपुर: अक्सर आप नेशनल हाईवे या फिर एक्सप्रेस-वे में ट्रैवल करते होंगे .तब आपको बहुत कुछ एक जैसा दिखता होगा, लेकिन दोनों में काफी अंतर है. जिनकी डिजाइन भी अलग होती है और रफ्तार भी. हालांकि देखने में अकसर दोनों एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन अंतर बहुत सारे हैं. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक्सपर्ट और प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृतलाल साहू ने लोकल18 से बात करते हुए ये बारीकियां बताई.

रफ्तार के साथ ही सड़क के दोनों और रेलिंग का अंतर 

एक तरफ देश में रफ्तार की क्रांति चल रही है, वहीं दूसरे तरफ नए-नए नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे भी लगातार बनते हुए चले जा रहे हैं. जहां यह प्रोजेक्ट्स यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए समय को बचाते हुए डिजाइन किए जा रहे हैं. जिसके चलते अब यात्रियों को आवागमन में काफी सुविधा मिल रही हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए सड़क मार्ग भी एक बेहतर विकल्प बन चुका है. जिसको लेकर देशभर में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस वे तैयार किए जा रहे हैं.

NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृतलाल साहू ने लोकल 18 से बताया नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे में सबसे बड़ा अंतर स्पीड का होता है. जहां नेशनल हाईवे को 80 से लेकर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से और एक्सप्रेस-वे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तैयार किया जाता है. जहां व्हीकल की रफ्तार को आधार मानकर एक्सप्रेस वे और नेशनल हाईवे को तैयार किया जाता है. इसके अलावा एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ से रेलिंग से घिरा हुआ होता है, जबकि नेशनल हाईवे में रेलिंग हो भी सकती है और नहीं भी.

ऊंचाई पर बनाए जाते हैं एक्सप्रेस-वे, टोल ज्यादा

उन्होंने बताया हाईवे से अधिक एक्सप्रेस-वे की ऊंचाई होती है, एक्सप्रेस-वे के किनारे कोई बसावट नहीं होती है, इसे इस तरीके से तैयार किया जाता है कि कोई मोड़ न हो, जिसके चलते गाड़ियां सीधी चलती रहे. इसके अलावा एक्सप्रेस वे में जगह-जगह व्हीकल के लिए एंट्री और एग्जिट प्वाइंट भी बनाए जाते हैं. उन्होंने बताया एक्सप्रेस-वे की तुलना में नेशनल हाईवे में टोल टैक्स कम होता है. इतना ही नहीं नेशनल हाईवे में 2 लाइन से लेकर 4 लाइन की चौड़ी सड़क होती है, जबकि एक्सप्रेस-वे में 6 लाइन से 8 लाइन की तेज गति वाली सड़क बनाई जाती है.

एक जैसा होता हैं सड़क मटेरियल

उन्होंने बताया एक्सप्रेस-वे और नेशनल हाईवे में एक जैसा सड़क मटेरियल का इस्तेमाल होता हैं क्योंकि हाईवे की डिजाइन ट्रैफिक के आधार पर होती है. जिसके चलते ट्रैफिक के स्पेसिफिकेशन दोनों में एक जैसे होते हैं. उन्होंने बताया एक्सप्रेस-वे में स्पीड बढ़ जाती है, जिसके चलते पीसीयू की क्षमता बढ़ जाती है. जबकि नेशनल हाईवे में पैरामीटर के चलते पीसीयू क्षमता कम हो जाती है. यही कारण है कि नेशनल हाईवे की डिजाइन चेंज हो जाती है.

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