क्या है स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, जिससे ठीक हो गई 7 लोगों की एड्स की बीमारी

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Treatment For AIDS: अब तक एड्स की बीमारी का कोई इलाज नहीं है. 2022 तक इस बीमारी से दुनियाभर में 40.4 मिलियन लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है.एड्स के 7 मरीज स्टेम सेल थेरेपी से पूरी तरह ठीक हुए हैं.

ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएंसी वायरस (HIV) एक खतरनाक वायरस है जो शरीर के इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है. इससे ही एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिसिएंसी सिंड्राम यानी कि AIDS की बीमारी होती है. यदि एक बार इसका इंफेक्शन हो गया तो मरीज को पूरी जिंदगी भर इसके साथ जीना पड़ता है, क्योंकि इस बीमारी का अभी तक कोई इलाज नहीं मिल सका है. हालांकि मेडिकल केयर के साथ इस वायरस को कंट्रोल किया जा सकता है.

लेकिन हाल ही में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एड्स मरीजों के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई है. अब तक इससे एड्स के 7 मरीज पूरी तरह से डिजीज फ्री हो चुके हैं. तो क्या 44 साल से लाखों लोगों के मौत का कारण बनने वाली बीमारी एड्स का इलाज मिल गया है? चलिए इसका जवाब इस लेख की मदद से समझने की कोशिश करते हैं.

क्या है पूरा मामला

बर्लिन में एड्स का सातवां मरीज स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की मदद से डिजीज फ्री हो गया. यह इलाज बहुत मुश्किल और खतरनाक होता है, लेकिन कभी-कभी काम कर जाता है. अब तक जिन 6 लोगों की एचआईवी इस तरह ठीक हुई थी, उनके शरीर में एक खास तरह का जीन होता था, जो उन्हें वायरस से बचाता था. लेकिन इस बार जिस आदमी की बीमारी ठीक हुई, उसके शरीर में यह खास जीन नहीं था, जिसने एड्स के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों को अधिक आशाजनक कर दिया है. बर्लिन के फ्री यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिश्चियन गैबलर ने न्यू साइंटिस्ट को बताया कि उस व्यक्ति का बिना म्यूटेशन के ठीक हो जाना “हमें एचआईवी के इलाज के लिए अधिक विकल्प देता है”.

क्या है स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कई बार ब्लड डिसऑर्डर, कैंसर और कुछ ऑटोइम्यून डिजीज का इलाज या इसे ठीक कर सकता है. इसमें मरीज के शरीर के अनहेल्दी सेल्स को हेल्दी सेल्स के साथ बदला जाता है. इसके लिए कई बार डोनर की भी मदद ली जाती है.ये प्रोसीजर तब किया जाता है, जब बीमारी जानलेवा हो जाए और कोई भी दूसरे इलाज के विकल्प काम न करे.

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट है एड्स का इलाज?

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सबके लिए नहीं है. इसमें जान जाने का जोखिम बहुत अधिक होता है, इसलिए इसे उन लोगों पर ही इस्तेमाल किया जाता है जो जानलेवा बीमारी का सामना कर रहे हो या इसके आखिरी स्टेज पर पहुंच चुके हैं. जिसका मतलब है कि ये विकल्प एड्स का परमानेंट या कॉमन ट्रीटमेंट नहीं है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

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क्या है स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, जिससे ठीक हो गई 7 लोगों की एड्स की बीमारी

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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