क्या है मैहर ‘अटाला आर्ट सिटी’ विवाद? संतों का विरोध, कहा…मां शारदा की नगरी की बाहरी पहचान स्वीकार नहीं

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Maihar Dham News: मैहर में प्रशासन द्वारा अटाला आर्ट सिटी नाम से की जा रही ब्रांडिंग अब विवादों में घिर गई है. धार्मिक नगरी की पहचान मां शारदा देवी और बाबा अल्लाउद्दीन ख़ान से जोड़ने वाले संतों ने इसे संस्कृति पर हमला बताते हुए कहा…

Satna News: विंध्य की धार्मिक नगरी मैहर इन दिनों एक नई बहस के केंद्र में है. जिला प्रशासन ने हाल ही में शहर की ब्रांडिंग ‘अटाला आर्ट सिटी’ के नाम से की. इसके चलते साधु-संतों, समाजसेवियों और आम नागरिकों ने तीखा विरोध किया. मां शारदा देवी की नगरी और संगीत सम्राट बाबा अल्लाउद्दीन ख़ान की कर्मभूमि के लिए नया नाम तय करने की यह कवायद स्थानीय समाज में आक्रोश पैदा कर रही है.

साधु-संतों ने संस्कृति और परंपरा का अपमान बताया
लोकल 18 से बातचीत में कई संतों ने स्पष्ट कहा, ‘अटाला आर्ट’ की अवधारणा न तो भारतीय संस्कृति से जुड़ी है और न ही इसका कोई ऐतिहासिक महत्व है. संत गंगा शरण महाराज ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, अटाला एक मस्जिद और प्रेमिका से जुड़ा नाम माना जाता है, जिसका धार्मिक नगरी मैहर से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा, यह नाम हमारी संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय जनता के सम्मान के खिलाफ है. महाराज ने यह भी जोड़ा कि अल्लाउद्दीन ख़ान बाबा मां शारदा के पुत्र समान थे, उनका योगदान अमिट है. लेकिन, अटाला का उल्लेख न हिंदू शास्त्रों या साहित्य में कहीं नहीं मिलता है. इसे जोड़ना कहीं न कहीं पश्चिमी सभ्यता और गुलामी को थोपने जैसा है.

रामायण से जुड़ी पावन धरा को कैसे अटाला कहा जा सकता है?
इसी कड़ी में संत सीतावल्लभ शरण महाराज ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा, मैहर नगरी सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की धरोहर है. यही वह पावन भूमि है, जहां नौ लाख साल पहले त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने चित्रकूट से आगे बढ़ते हुए एक रात विश्राम किया था. संत महराज ने कहा, इस नगरी को अटाला आर्ट सिटी कहकर प्रमोट करना हमारी मूल संस्कृति और धरोहर को मिटाने की साज़िश है. उन्होंने जोर देकर कहा, मैहर मां शारदा देवी और बाबा अल्लाउद्दीन ख़ान की वजह से दुनिया भर में पहचान रखता है और इसे उसी रूप में सम्मान मिलना चाहिए.

मां शारदा की कृपा से ही मैहर की पहचान
वहीं, सतना से महंत पीयूष दास महाराज ने लोकल 18 से बातचीत में कहा, संतों और समाजसेवियों का विरोध पूरी तरह उचित है. उन्होंने कहा की मैहर में किया गया कोई भी कार्य मां शारदा की कृपा के बिना अधूरा है. बाहर की कोई सभ्यता या संस्था यहां आकर अपना आधिपत्य जमाए यह स्वीकार्य नहीं है.

स्थानीय पहचान बनाम बाहरी ब्रांडिंग
साफ है कि प्रशासन की ‘अटाला आर्ट सिटी’ ब्रांडिंग, स्थानीय धार्मिक भावनाओं से टकरा गई है. संतों का कहना है कि मैहर की पहचान हमेशा से मां शारदा देवी, सनातन संस्कृति और भारतीय संगीत धरोहर से रही है. ऐसे में अटाला जैसे नाम से किसी भी तरह की ब्रांडिंग इस विरासत को कमजोर करने का काम करेगी.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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