Can Women With Endometriosis Get Pregnant: एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी टिश्यू शरीर के अन्य हिस्सों में भी बढ़ने लगती है. यह बीमारी अक्सर चुपचाप महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है और कई बार माता-पिता बनने का सपना देखने वाले दंपतियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. एंडोमेट्रियोसिस के कारण गर्भधारण में दिक्कतें आ सकती हैं, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट मुश्किल हो सकता है और कुछ मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है. यही वजह है कि कई महिलाओं के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ही गर्भधारण का सबसे रियल विकल्प बन जाता है.
क्या है मामला?
TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा ही एक मामला 28 साल की एक महिला का सामने आया, जिसे गंभीर एंडोमेट्रियोसिस की समस्या थी और पहले कोई सर्जरी नहीं हुई थी. डॉक्टरों ने बीमारी की गंभीरता को देखते हुए आईवीएफ कराने की सलाह दी, कई दंपतियों की तरह इस महिला और उसके पति ने भी उम्मीद की थी कि लंबे संघर्ष के बाद अब उन्हें खुशखबरी मिलेगी. महिला ने ओवम निकालने की प्रक्रिया ओसाइट पिक-अप कराई और शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था.
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लेकिन प्रक्रिया के चार दिन बाद महिला को तेज बुखार आने लगा, जो एंटीबायोटिक दवाओं के बावजूद ठीक नहीं हो रहा था, जल्द ही उसे पेट में तेज दर्द, ठंड लगना और कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होने लगे. जांच के बाद पता चला कि उसके ओवम में करीब 10 से 12 सेंटीमीटर का बड़ा एब्सेस यानी पस से भरी गांठ बन गई है. इतना ही नहीं, इंफेक्शन पेट के अंदर फैलकर लिवर तक पहुंच गया था. अब मामला फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से आगे बढ़कर जान बचाने तक पहुंच चुका था और तुरंत सर्जरी करना जरूरी हो गया.
कैसे किया गया इलाज?
बेंगलुरु के मदरहुड हॉस्पिटल में डॉ. माधुरी विद्याशंकर की अगुवाई में सर्जरी की गई. ऑपरेशन के दौरान पाया गया कि पस कई अंगों तक फैल चुकी थी और इंफेक्शन के कारण आंतें ओवम से चिपक गई थीं. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मरीज की जान बचाने के साथ-साथ उसकी प्रजनन क्षमता को भी सुरक्षित रखा जाए. डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक एब्सेस को निकालकर इंफेक्शन साफ किया और दोनों ओवम को सुरक्षित रखने में सफलता पाई.
हो सकता है बचाव?
कई महीनों बाद महिला फिर से स्वस्थ होकर आईवीएफ की प्रक्रिया के लिए तैयार हुई. इस बार इलाज सफल रहा, वह गर्भवती हुई और बाद में उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी में फर्टिलिटी का सफर आसान नहीं होता, लेकिन सही समय पर इलाज और एक्सपर्ट की देखरेख में उम्मीद फिर से जिंदा हो सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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