स्मोकिंग करने से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं? बीडी-सिगरेट का धुआं कितना घातक

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Impact of Bidi and Cigarettes: स्मोकिंग को सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है. पल्मोनोलॉजिस्ट की मानें तो बीड़ी और सिगरेट का धुआं फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है. इन चीजों का धुआं हार्ट, कैंसर, स्ट्रोक और इनफर्टिलिटी जैसी कई समस्याओं का कारण बन सकता है. इन बीमारियों से बचने के लिए स्मोकिंग छोड़ना जरूरी है.

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स्मोकिंग से कई घातक बीमारियां पैदा हो सकती हैं.

Smoking-Related Diseases: स्मोकिंग करना सेहत के लिए नुकसानदायक है, लेकिन फिर भी तमाम लोग शौक से बीड़ी-सिगरेट पीते हुए देखे जा सकते हैं. कई लोग स्मोकिंग को शौक समझते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह शौक आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है. बीड़ी-सिगरेट का धुआं हमारे शरीर के लिए एक धीमा जहर है, जो सभी ऑर्गन्स को धीरे-धीरे खोखला कर देता है. बीड़ी और सिगरेट के धुएं में निकोटीन, कार्बन मोनोऑक्साइड और टार जैसे सैकड़ों हानिकारक केमिकल्स होते हैं, जो फेफड़ों की बीमारी, हार्ट डिजीज और कैंसर का कारण बन सकते हैं. स्मोकिंग करने से पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि यह आदत हमारे शरीर के लिए कितनी घातक है और इससे कौन-कौन सी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.

नई दिल्ली के मूलचंद हॉस्पिटल के पूर्व पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. भगवान मंत्री ने News18 को बताया कि स्मोकिंग का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर पड़ता है. जब कोई व्यक्ति बीड़ी या सिगरेट पीता है, तो गर्म धुआं सीधे फेफड़ों की नलिकाओं तक पहुंचता है, जिससे वे झुलस जाती हैं. लंबे समय तक स्मोकिंग करने से फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. इसके अलावा क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और एम्फिसीमा जैसी बीमारियां फेफड़ों की कार्यक्षमता को परमानेंट तरीके से नष्ट कर देती हैं, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है.

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डॉक्टर ने बताया कि स्मोकिंग का सीधा असर हमारे हार्ट और ब्लड सर्कुलेशन पर भी पड़ता है. तंबाकू में मौजूद निकोटीन ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा देता है और कार्बन मोनोऑक्साइड खून में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है. इससे हार्ट को शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लगातार स्मोकिंग से धमनियों में प्लाक जमा होने लगता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है. यही कारण है कि धूम्रपान करने वालों में हार्ट अटैक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज की आशंका नॉन-स्मोकर्स की तुलना में बहुत ज्यादा होती है. बीड़ी-सिगरेट के धुएं का घातक असर केवल छाती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह ब्रेन तक भी पहुंचता है. निकोटीन के कारण ब्रेन की ब्लड वेसल्स कमजोर या संकुचित हो सकती हैं, जिससे ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. स्ट्रोक के कारण शरीर का कोई हिस्सा लकवाग्रस्त हो सकता है या मौत भी हो सकती है.

एक्सपर्ट की मानें तो धूम्रपान से याददाश्त में कमी, एकाग्रता की कमी और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, क्योंकि यह मस्तिष्क के न्यूरोकेमिकल संतुलन को बिगाड़ देता है. अधिकांश लोग सोचते हैं कि धूम्रपान केवल फेफड़ों को नुकसान पहुँचाता है, लेकिन यह पाचन तंत्र के लिए भी उतना ही खतरनाक है. धुएं के साथ अंदर जाने वाले टॉक्सिक एलीमेंट पेट, पैनक्रियाज और किडनी के कैंसर का कारण बन सकते हैं. यह पेट में एसिड की मात्रा बढ़ाता है, जिससे पेप्टिक अल्सर और गंभीर एसिडिटी की समस्या होती है. यह इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को कम कर देता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है.

स्मोकिंग की आदत पुरुष और महिलाओं दोनों की फर्टिलिटी पर बहुत बुरा असर डालती है. बीड़ी-सिगरेट का धुआं पुरुषों में यह स्पर्म काउंट और क्वालिटी गुणवत्ता को कम करता है, जबकि महिलाओं में प्रेग्नेंसी कंसीव करने में जटिलताएं पैदा कर सकता है. गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करना अजन्मे बच्चे के लिए जानलेवा हो सकता है, जिससे समय से पहले जन्म या कम वजन वाले बच्चे जैसी समस्याएं होती हैं. इसके अलावा यह हड्डियों को कमजोर बनाता है और त्वचा पर असमय झुर्रियां पैदा कर देता है, जिससे व्यक्ति अपनी उम्र से काफी बड़ा दिखने लगता है. धूम्रपान करने वाला व्यक्ति न केवल खुद को बीमार करता है, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी खतरे में डालता है. इसे पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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