नाइट शिफ्ट करने से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं? अगर आप भी करते हैं ऐसा, तो जरूर पढ़ें खबर

Night Shift Work and Health Problems: आजकल हर क्षेत्र में रात को भी काम करने का चलन बढ़ गया है. तमाम कंपनियां 24*7 सर्विसेज प्रदान करती हैं और इसकी वजह से नाइट शिफ्ट में भी कर्मचारी काम करते हैं. नाइट शिफ्ट में काम करना सुबह के मुकाबले काफी चैलेंजिंग होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो नाइट शिफ्ट में काम करने से शरीर का सिस्टम बिगड़ जाता है और इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो नाइट शिफ्ट में काम करने से बचें. रात में काम करने से कई परेशानियां ट्रिगर भी हो सकती हैं. इसलिए आपको सेहत का खास खयाल रखना चाहिए.

न्यूज मेडिकल लाइफ साइंसेज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक नाइट शिफ्ट का सबसे बड़ा असर शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम पर पड़ता है. हमारा शरीर दिन में जागने और रात में सोने के हिसाब से काम करता है. जब कोई व्यक्ति रात में काम करता है और दिन में सोता है, तो यह नेचुरल चक्र उल्टा हो जाता है. इससे शरीर के हार्मोन, तापमान, याददाश्त और मानसिक कार्यक्षमता प्रभावित होती है और लगातार थकान, नींद न आना व चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है.

नाइट शिफ्ट करने वालों में सबसे कॉमन समस्या नींद से जुड़ी होती है. दिन में सोने के कारण नींद पूरी नहीं हो पाती और औसतन ऐसे लोगों को सामान्य से 2 से 4 घंटे कम नींद मिलती है. इसके अलावा दिन की रोशनी और शोर नींद को बार-बार तोड़ देते हैं, जिससे नींद की क्वालिटी भी खराब होती है. इसका नतीजा यह होता है कि काम के दौरान नींद आती है, ध्यान की कमी होती है और गलती या दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. नाइट शिफ्ट करने वाले लोगों को नींद को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

नाइट शिफ्ट का मेंटल हेल्थ पर भी गहरा असर पड़ता है. रिसर्च बताती हैं कि नाइट शिफ्ट में काम करने वालों में स्ट्रेस, घबराहट, चिड़चिड़ापन और एंजायटी की समस्या ज्यादा होती है. लंबे समय तक ऐसा रुटीन फॉलो करने से क्रॉनिक थकान, एंजायटी, डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर तक हो सकते हैं. कई मामलों में लोगों को नींद की दवाएं या अन्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाओं की जरूरत भी पड़ती है. जिन लोगों को पहले से मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या हो, वे नाइट शिफ्ट करने से बचें.

नाइट शिफ्ट का असर पाचन तंत्र पर भी साफ दिखाई देता है. देर रात खाने की आदत, गलत समय पर खाना और ज्यादा तले-भुने या प्रोसेस्ड फूड खाने से गैस, एसिडिटी, अपच और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. कई रिसर्च में पाया गया है कि नाइट शिफ्ट करने वालों में इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, पेप्टिक अल्सर और पेट से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा दिन में काम करने वालों की तुलना में ज्यादा होता है.

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हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो नाइट शिफ्ट मेटाबॉलिक और हार्ट डिजीज का खतरा भी बढ़ाती है. मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा नाइट शिफ्ट करने वालों में ज्यादा पाया गया है. कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि नाइट शिफ्ट से दिल की बीमारियों का जोखिम करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. वहीं कैंसर को लेकर भी नाइट शिफ्ट से जुड़ा संबंध देखा गया है. हालांकि इस पर अभी ज्यादा रिसर्च की जरूरत है. इसलिए अगर आप नाइट शिफ्ट करते हैं, तो अपनी नींद, खान-पान और स्वास्थ्य जांच पर खास ध्यान दें.

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