मृत्यु के बारे में बात करना कठिन हो सकता है. कई लोग जब मृत्यु आती है तो खुद को तैयार नहीं पाते. पिछले दिनों “द न्यू यॉर्क टाइम्स” ने अपने पाठकों से मृत्यु और मरने के बारे में उनके सवाल पूछे. जो संपत्ति और अंतिम संस्कार की योजना, शोक प्रबंधन, अपने अंतिम दिनों पर नियंत्रण से संबंधित रहे.
मृत्यु के चरण क्या हैं
जीवन के हर दूसरे हिस्से की तरह, हर व्यक्ति के अंतिम दिन अलग-अलग होते हैं. चिकित्सा विशेषज्ञ और हॉस्पिटल देखभाल कर्मी कुछ सामान्य पैटर्न बताते हैं.
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उस समय लोगों को अक्सर निगलने में तकलीफ़ होती है. त्वचा पर नीले धब्बे पड़ जाते हैं या चेहरा लटक जाता है. सांस लेने की गति रुक-रुक कर हो सकती है – कभी तेज़ और उथली, फिर गहरी और तेज़..और कभी-कभी कुछ समय के लिए पूरी तरह से रुक भी सकती है. व्यक्ति का शरीर ठंडा हो सकता है, या बुखार से गर्म हो सकता है. चेतना कमजोर हो जाती है.
मृत्यु खड़खड़ाहट क्या है
क्या मरता हुआ शख्स आसपास के लोगों की आवाज सुन सकता है
अस्पताल के केयर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा ही लगता है. कुछ प्रमाण हैं कि कोमा के मरीज़ अपने आस-पास की बातें सुन और समझ सकते हैं. 2020 के एक छोटे से अध्ययन में मृत्यु के करीब पहुंच चुके बेहोश मरीज़ों के मस्तिष्क की गतिविधियां दर्ज की गई. पाया गया कि वे ध्वनियों पर उसी तरह प्रतिक्रिया करते हैं जैसे युवा और स्वस्थ लोग करते हैं.
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क्या मुझे पता लगेगा कि मैं मर रहा हूं
क्या मरने के पास का समय दर्दनाक होता है
ऐसा हो सकता है. क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, बहुत कुछ मृत्यु के कारण पर निर्भर करता है. इस बात पर भी कि निर्भर करता है कि मरने वाले व्यक्ति को दर्द कम करने के लिए दवा दी गई है या नहीं. अगर किसी व्यक्ति को कोई गंभीर चोट लगी है या वह बीमारी के अंतिम चरण से पीड़ा में है, तो ये पीड़ा आखिर समय तक जारी रह सकती है.
मृत्यु के निकट के अनुभव क्या हैं
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डेथ कैफे क्या है
डेथ कैफे एक ऐसा कार्यक्रम है जहां लोग मृत्यु और मरने के बारे में खुलकर बात करने के लिए इकट्ठा होते हैं. इसका उद्देश्य मृत्यु के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को अपने जीवन का अधिकतम लाभ उठाने में मदद करना है. यह एक ऐसा स्थान है जहां लोग मृत्यु के बारे में अपने अनुभव साझा कर सकते हैं. मृत्यु को लेकर तमाम सवाल पूछते हैं. बिना किसी डर या निर्णय के चर्चा कर सकते हैं. यह मृत्यु को जीवन का एक सामान्य हिस्से के रूप में स्वीकार करने में मदद करता है.
भारत में ऐसे मंच उभर रहे हैं जहां मृत्यु, मौत और मरने के बारे में जानकारी और चर्चा की जा सकती है. कुछ राज्यों में डेथ कैफ़े आयोजित किए जाते हैं, केरल में नियमित सत्र आयोजित किए जाते हैं.
आपके मरने के बाद शरीर का क्या होता है
मृत्यु के बाद मांसपेशियां और जोड़ अकड़ने लगते हैं. हालांकि ऐसा होने से पहले शरीर पूरी तरह से शिथिल हो जाता है. इससे त्वचा ढीली पड़ सकती है. अक्सर मूत्राशय और मलाशय से मल निकल जाता है. बहुत से लोग मरते समय खुद को गंदा कर लेते हैं. शरीर ठंडा हो जाता है. गुरुत्वाकर्षण द्वारा नीचे खींचा गया रक्त स्थिर होकर जमा हो जाता है, जिससे त्वचा पीली और धब्बेदार हो जाती है. कुछ घंटों के बाद मृत्यु की कठोरता शुरू हो जाती है. यह आमतौर पर कुछ दिनों तक रहता है. फिर शरीर फिर से शिथिल हो जाता है.
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