नाखूनों की कमजोरी बता सकती है आपके शरीर की अंदरूनी बीमारी, जानें कैसे!

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अक्सर हम अपने नाखूनों को सिर्फ सुंदरता से जोड़कर देखते हैं, लेकिन ये हमारी सेहत का आईना भी होते हैं. चमकदार और मजबूत नाखून इस बात का संकेत हैं कि शरीर अंदर से स्वस्थ और पोषण से भरपूर है, जबकि कमजोर, टूटते या दागदार नाखून शरीर में पोषक तत्वों की कमी और आंतरिक असंतुलन का संकेत देते हैं. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि नाखूनों की स्थिति हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य की झलक दिखाती है.

हमारी सेहत का हाल बताने में त्वचा, बाल और नाखून एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जब शरीर अंदर से मजबूत और पोषण से भरपूर होता है, तो नाखून चमकदार और मजबूत होते हैं. लेकिन, जैसे ही शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, इसका सबसे पहला संकेत नाखूनों पर दिखाई देता है. वे टूटने लगते हैं, छिलने लगते हैं या उन पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इसे शरीर के भीतर की आंतरिक गड़बड़ी का संकेत मानते हैं.

नाखून

आयुर्वेद के अनुसार नाखून अस्थिधातु (हड्डियों) का सहायक तत्व (उपधातु) होते हैं। जब शरीर में अस्थिधातु की पोषण प्रक्रिया में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर नाखूनों की गुणवत्ता पर दिखाई देने लगता है. यही वजह है कि कमजोर नाखून सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक समस्या का प्रतीक हैं.

नाखून

वहीं, आधुनिक मेडिकल साइंस के अनुसार नाखून मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं. इस प्रोटीन के निर्माण और मजबूती के लिए शरीर को कुछ खास पोषक तत्वों की जरूरत होती है. जब इन पोषक तत्वों की कमी होती है, तो नाखूनों की गुणवत्ता गिरने लगती है.

नाखून

नाखूनों का कमजोर होना और टूटना मुख्य रूप से शरीर में कुछ महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी से जुड़ा हुआ है. बायोटिन (विटामिन बी7) नाखूनों की मजबूती के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व है. यह शरीर में केराटिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है. बायोटिन की कमी होने पर नाखून पतले हो जाते हैं, जल्दी टूटते हैं और छिलने लगते हैं.

नाखून

आयरन (लौह तत्व) शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब आयरन कम हो जाता है, तो नाखूनों को जरूरी ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता. इससे नाखून मुड़ने (चम्मच के आकार के होने) लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में कोइलोनाइकिया कहते हैं.

नाखून

जिंक (जस्ता) एक महत्वपूर्ण मिनरल है, जो नाखूनों की मरम्मत (रिपेयर) में मदद करता है. इसकी कमी से नाखूनों पर सफेद धब्बे नजर आने लगते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे नाखूनों की ग्रोथ धीमी पड़ जाती है.

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विटामिन ई और सी दोनों ही एंटीऑक्सीडेंट्स की तरह काम करते हैं और कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं. विटामिन सी की कमी से शरीर में कोलेजन बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जो नाखूनों को लचीलापन देता है और टूट-फूट से बचाता है.

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आयुर्वेद इस बात पर जोर देता है कि जब शरीर की अग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर होती है, तो खाया गया भोजन ठीक से नहीं पचता और शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता. इसका असर सबसे पहले बालों और नाखूनों पर नजर आता है. इसलिए कमजोर और टूटते नाखूनों को केवल बाहरी उपाय से ठीक करने के बजाय, शरीर की पाचन शक्ति को सुधारना और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार लेना सबसे अधिक आवश्यक है.

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