एमपी में आज से वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन: 11 प्रकार के दस्तावेज जरूरी , कैसे और कब होगा सत्यापन; 9 सवालों में जानिए पूरी प्रोसेस – Madhya Pradesh News

देश के 12 राज्यों में वोटर लिस्ट अपडेशन का काम आज से शुरू होने जा रहा है। इन 12 राज्यों में एमपी भी शामिल है। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की 103 दिन की प्रोसेस होगी। ये प्रोसेस अगले साल 7 फरवरी 2026 को खत्म होगी और इस दिन फाइनल वोटर

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बता दें कि चुनाव आयोग साल में चार बार वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया करता है। SIR की इस प्रोसेस का मकसद वोटर लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट करना है। जिसमें फर्जी मतदाताओं के नाम हटाना, जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके नाम डिलीट करना, जो नाम छूट गए हैं उन नामों को जोड़ना है। इस प्रोसेस में बीएलओ घर-घर जाकर वोटर्स के नाम सत्यापित करेंगे।

बीएलओ घर कब आएंगे? सत्यापन के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे? किसी का दो जगह नाम है तो उनके खिलाफ क्या कोई कार्रवाई होगी? इस पूरी प्रोसेस को 9 सवाल-जवाब में जाने।

1.एसआईआर क्या है? एसआईआर यानी विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन)। यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है जिसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा उम्र के पात्र वोटर्स को जोड़ा जाता है और अपात्र लोग यानी जिनकी मौत हो चुकी है, जो दूसरे पते पर शिफ्ट हो चुके हैं या डुप्लीकेट वोटर हैं, उनके नाम वहां की वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है।

2. एसआईआर कैसे होगा? SIR के दौरान BLO प्रत्येक मतदाता को एक विशिष्ट गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फॉर्म) वितरित करेंगे। इस फॉर्म में मतदाता का मौजूदा विवरण (पिछली मतदाता सूची से) पहले से भरा होगा। मतदाता को इस डिटेल को सत्यापित करना होगा और जानकारी मैच करवाना होगी।

यदि किसी मतदाता का नाम या मतदाता के माता– पिता या दादा, चाचा या कोई और रिश्तेदार का नाम 2003 के SIR के दौरान तैयार की गई सूची में मौजूद है, तो उन्हें ज्यादा दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे।

3.घर-घर जाकर सत्यापन के क्या मायने है? निर्वाचन आयोग ने हर बूथ के लिए एक बूथ लेवल ऑफिसर को तैनात किया है। इसे शॉर्ट फॉर्म में बीएलओ कहा जाता है। बीएलओ के पास उसके बूथ के वोटर्स की लिस्ट होती है। एक बूथ पर करीब 1 हजार से 1200 के बीच वोटर्स होते हैं। अब बीएलओ को इन एक हजार वोटर्स के घरों तक जाना है।

एक घर में दो या दो से ज्यादा वोटर्स भी रहते हैं। बीएलओ हर एक वोटर से नहीं मिलेंगे बल्कि वो घर जाकर वहां रहने वाले वोटर्स के नाम को विशिष्ट गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फॉर्म) के जरिए सत्यापित करेंगे। ये काम 4 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच होगा।

4. हर मतदाता को 4 नवंबर के बाद घर पर रहना होगा? ऐसा बिल्कुल नहीं है, यदि मतदाता घर पर नहीं है तो उसकी गैरमौजूदगी में परिवार के सदस्य उसका सत्यापन करवा सकते हैं। चुनाव आयोग ने निर्देश दिए है कि बीएलओ इस एक महीने में एक घर में तीन बार जाएंगे। यदि पहली बार में सारे वोटर्स का सत्यापन नहीं हुआ तो उन्हें दूसरी या तीसरी बार में ये काम करना पड़ेगा।

यदि मतदाता घर पर नहीं मिले तो बीएलओ पड़ोसियों को सूचना देंगे कि अगली बार वो किस तारीख पर आने वाले हैं, या फिर सीधे मतदाता को फोन भी कर सकते हैं। इसमें सलाह यही है कि बहुत ज्यादा जरूरी न हो तो परिवार के सभी सदस्य एक साथ बाहर न जाए और एक सदस्य कम से कम घर पर रहे। इसके बाद भी यदि किसी कारण से सत्यापन नहीं होता तो 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ सकते हैं।

5. किसी मतदाता का नाम दो जगह की वोटर लिस्ट में है तो क्या होगा? एसआईआर का मकसद ही डुप्लीकेसी को खत्म करना है। एक वोटर के अगर दो जगह की वोटर लिस्ट में है तो उससे पूछा जाएगा कि वह किस विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में अपना नाम रखना चाहता है। उदाहरण के तौर पर किसी वोटर का नाम भोपाल की नरेला विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट और विदिशा सीट की वोटर लिस्ट में नाम जुड़ा है। उसे एक जगह से अपना नाम कटवाना पड़ेगा।

एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान मतदाता से एक घोषणा पत्र भी भरवाया जाएगा। इस पर मतदाता या फिर रिश्तेदार के साइन होंगे। इसमें लिखा होगा कि जो जानकारी दी जा रही है वह सही है इसे मैं यानी मतदाता स्वयं सत्यापित करता हूं। अगर जानकारी गलत होती है तो मुझ पर दंडात्मक कार्यवाही की जा सकती है।

6. एसआईआर में गलत जानकारी दी तो क्या होगा? एसआईआर की प्रक्रिया पीपुल्स ऑफ रिप्रजेंटेंशन एक्ट या लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 के तहत की जा रही है। इसी एक्ट की धारा 31 के तहत, यदि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर कोई झूठा लिखित बयान या घोषणा करता है तो वह दंडनीय होगा। इस अपराध के लिए एक साल की सजा का प्रावधान या जुर्माना दोनों हो सकता है।

7. दूसरे राज्य से आने वाली बहू का क्या होगा? एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान वोटर लिस्ट फ्रीज हो गई है यानी अब सामान्य प्रक्रिया के तहत न तो नए नाम जोड़े जाएंगे और न ही नाम कटेंगे। अगर घर में नई बहू आई है तो एसआईआर की प्रक्रिया के तहत उसका नाम नई वोटर लिस्ट में नए पते पर जुड़ेगा।

गणना प्रपत्र के साथ फॉर्म 8 भरना होगा जिसमें वोटर लिस्ट में संशोधन हो सकेगा और नई बहू का नाम ससुराल वाले पते पर जुड़ जाएगा। इसके साथ ही 18 साल पूरे करने वाले युवा भी फॉर्म 6 के साथ नई वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की सहूलियत मिलेगी।

8. 2003 के बाद बसने वालों का वेरिफिकेशन होगा या नहीं? इसके लिए ऑल इंडिया डेटाबेस बना है। मध्यप्रदेश में 2003 में एसआईआर हुआ था। उस वोटर को इस डेटाबेस से अपने माता- पिता या दादा- दादी के नाम उस राज्य की वोटर लिस्ट से लिंक करना होगा जहां वे पहले रहते थे। साल 2005 में गुजरात से मध्य प्रदेश आकर बसे रघुराज के उदाहरण से इसे समझ सकते हैं।

रघुराज को ऑल इंडिया डेटाबेस से गुजरात राज्य के पुराने पते पर अपने माता- पिता और दादा- दादी का नाम अपने नाम से लिंक करना होगा। और जरूरी दस्तावेज देने होंगे। इस प्रक्रिया के तहत उसका नाम एसआईआर में जुड़ जाएगा।

9. क्या यह सारी प्रक्रिया ऑनलाइन भी हो सकती है? भारत के अधिकतर राज्यों में एसआईआर 2002 से 2004 के बीच हुई थी। चुनाव आयोग से सभी राज्यों की आखिरी एसआईआर की जानकारी ऑल इंडिया डेटाबेस में दी है। इस वेबसाइट पर जाकर वोटर काे अपने नाम के साथ उसे लिंक करना होगा और ऑनलाइन ही गणना फॉर्म सामने आ जाएगा जिसमें जरूरी जानकारी भरनी होगी।

फिर बीएलओ इस फॉर्म का प्रिंटआउट सत्यापन के लिए आपके पते पर लेकर आएंगे। और इस पर आपके या आपके रिश्तेदार के हस्ताक्षर लेंगे साथ ही घोषणापत्र पर भी साइन करने होंगे।

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