कुसमी के जूरी बांध की नहर निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने रविवार को जिला पंचायत सीईओ से इसकी शिकायत की है। उनका आरोप है कि ग्राम बकियां और जूरी के पास बन रही नहर में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके कारण निर्माण के तुरंत बाद ही कई जगहों पर नहर टूटने लगी है। यह परियोजना 65 लाख रुपये से अधिक की लागत से बनाई जा रही है। इसमें बांध की मरम्मत के साथ-साथ नहर और नाली निर्माण का कार्य शामिल है। इसका उद्देश्य जूरी गांव के तीन मोहल्लों और आसपास के गांवों के लगभग 200 हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाना है। हालांकि, निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नहर निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम डाली जा रही है और घटिया किस्म की रेत का उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, नहर की मोटाई और गहराई भी निर्धारित मानकों से काफी कम रखी गई है। इस वजह से नहर में पानी रुक नहीं पा रहा है और यह एक नाली की तरह दिखती है। पानी खेतों तक न पहुंचने के कारण किसान परेशान हैं। कई किसानों की गेहूं की बुवाई भी प्रभावित हुई है। ग्राम जूरी निवासी अर्जुन सिंह ने बताया कि इस निर्माण कार्य की शिकायत पहले भी कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सिंह ने यह भी बताया कि यह कार्य सिंचाई विभाग की नहर का है, लेकिन इसका निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के माध्यम से कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिससे कार्य की लागत, निर्माण एजेंसी और समय सीमा की जानकारी उपलब्ध नहीं है। मजदूरों का भुगतान भी अभी तक लंबित बताया जा रहा है। .