विदिशा में 125 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक चलित रामलीला में रविवार को भगवान श्रीराम के जन्म और उनकी बाललीलाओं का मंचन किया गया। इस दौरान पूरा रामलीला प्रांगण ‘भये प्रगट कृपाला’ और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। मंचन में भगवान श्रीराम के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नामकरण संस्कार और बाललीलाएं भी प्रस्तुत की गईं। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भगवान के बालरूप के दर्शन के लिए मौजूद रहे। इस रामलीला की खासियत इसकी अनूठी चलित शैली है, जिसमें पात्र एक स्थान पर स्थिर न रहकर पूरे मैदान में घूम-घूमकर लीला का मंचन करते हैं। दो तस्वीरों में देखिए रामलीला का मंचन… भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का मंचन श्रीरामलीला मेला के पांचवें दिवस की शुरुआत श्री गणेश, शारदा एवं नारद वंदना से हुई। इसके बाद मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का मंचन किया गया। श्रीराम जन्म के अवसर पर महाराज दशरथ द्वारा ब्राह्मणों, गरीबों एवं भिक्षुओं को दान देने का दृश्य दिखाया गया। माता कौशल्या के साथ चारों राजकुमारों की विमान परिक्रमा ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। लीला में चारों राजकुमारों द्वारा गुरुओं से धनुर्विद्या, वेदपाठ एवं अन्य शिक्षाएं ग्रहण करने तथा अपनी विद्या का प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया गया। आगे की लीला में मुनि विश्वामित्र का अयोध्या आगमन, यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को ले जाना, ताड़का वध, सुबाहु वध और मारीच को बाण से लंका भेजने का सजीव मंचन किया गया। लीला का समापन आरती के साथ हुआ। मकर संक्रांति से शुरू हुई यह रामलीला 9 फरवरी तक चलेगी, जहां प्रतिदिन विभिन्न लीलाओं का मंचन किया जा रहा है। .