Success Story: गरीबी और अंधेरे कमरों की तंगहाली किसी के सपनों को नहीं मार सकती, यह साबित कर दिखाया है जमशेदपुर की मंजू देवी ने. कभी पार्लर में काम कर घर चलाने वाली मंजू ने आज जूट पेंटिंग के जरिए अपनी पहचान सात समंदर पार तक पहुंचा दी है. उनका संघर्ष तब शुरू हुआ जब वे लालटेन की रोशनी में कला के रंग उकेरती थीं, लेकिन आज उनकी सालाना कमाई लाखों में है. मंजू देवी की सफलता का राज उनकी रचनात्मकता है. वे जूट से बने बैग, बॉटल होल्डर और कॉर्पोरेट डायरी सेट पर झारखंड की पारंपरिक सोहराय पेंटिंग उकेरती हैं. जूट के उत्पादों पर लोक संस्कृति का यह फ्यूजन कॉरपोरेट जगत और विदेशी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रहा है. पार्लर की नौकरी छोड़ स्वयं सहायता समूह से जुड़कर हुनर सीखने वाली मंजू अब एक सफल उद्यमी हैं. उनके बनाए उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों की भी शोभा बढ़ा रहे हैं. मंजू देवी का यह सफर उन सभी महिलाओं के लिए मिसाल है जो सीमित संसाधनों में बड़ा लक्ष्य पाना चाहती हैं.
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