Middle East Tensions: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए Russia से दोबारा तेल खरीदने का फैसला किया है. इस कदम की United States ने सराहना करते हुए भारत को “ग्रेट पार्टनर” बताया है. अमेरिका का कहना है कि संकट के समय भारत का यह कदम वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा.
अमेरिका ने भारत को बताया ग्रेट पार्टनर
अमेरिका में भारत के राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारत एक बड़ा खरीदार और उपभोक्ता है. ऐसे में बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए अमेरिका और भारत के बीच सहयोग बेहद जरूरी है.
रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट
मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात और उससे पैदा हुई ऊर्जा चिंताओं के बीच अमेरिका ने भारत को रूस से सीमित मात्रा में तेल खरीदने की अस्थायी छूट भी दी है. वाशिंगटन का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य संकट के समय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना है. Karoline Leavitt, जो White House की प्रेस सेक्रेटरी हैं, ने कहा कि Iran से जुड़े तनाव के कारण मिडिल ईस्ट में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है. ऐसे में यह कदम अस्थायी रूप से उठाया गया है, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहे.
तनाव के बीच राहत
इससे पहले रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा दिया था. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर घोषणा करते हुए इस अतिरिक्त टैरिफ को हटाने का फैसला किया. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि भारत ने पहले रूस से तेल खरीद में कमी की थी और उसका रुख सहयोगात्मक रहा है. ऐसे में Iran से जुड़े मौजूदा संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति में जो कमी आ रही है, उसे पूरा करने के लिए भारत को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है.
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