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What Causes Frequent Urination: टॉयलेट जाने की जरूरत आपके सेहत को लेकर कई बड़े इशारे करती है. यदि आप दिन में बार-बार पेशाब आने से परेशान है, तो इस समस्या को नजरअंदाज न करें. ये गंभीर बीमारियों का इशारा हो सकती है. हालांकि इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि बच्चों और बुजुर्गों में पेशाब आने की आवृति अधिक होती है.
किडनी शरीर का कचरा खून से छानकर पेशाब के रूप में सिस्टम से बाहर निकालता है. ऐसे में आप कितनी बार पेशाब जाते हैं, ये आपकी सेहत का एक अहम संकेत होता है.कुछ लोग रात में कई बार उठकर टॉयलेट जाते हैं, जबकि कुछ पूरा दिन दफ्तर में बैठने के बाद भी एक बार ही जाते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि अगर यह आदत सामान्य सीमा से ज्यादा या कम हो, तो यह शरीर में किसी बदलाव या बीमारी का इशारा हो सकता है.
न्यू विक्टोरिया हॉस्पिटल के कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट डॉ. हामिद अब्बूदी ने मेट्रो मीडिया साइट से बात करते हुए बताया कि कॉफी, शराब और सोडा जैसी चीजें ब्लैडर को ज्यादा एक्टिव कर देती हैं. इससे बार-बार पेशाब लग सकता है. इसके अलावा कुछ मेडिकल कंडीशन भी इस पर असर डाल सकती हैं. इसमें यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), प्रोस्टेट या ब्लैडर कैंसर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और स्ट्रोक जैसी बीमारियां शामिल हैं. इसके अलावा महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान भी ये एक समस्या के रूप में नजर आ सकता है.
बच्चों का एक दिन में कितनी बार पेशाब करना नॉर्मल
छोटे बच्चों को आमतौर पर दिन में 8 से 14 बार पेशाब करने की जरूरत पड़ती है. जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं यह संख्या लगभग 6 से 12 बार हो जाती है. अगर किसी बच्चे को इससे ज्यादा बार पेशाब की आवश्यकता महसूस हो रही है, तो इसका कारण कैफीन युक्त पेय पदार्थ, कब्ज़, या एलर्जी भी हो सकती है.
किशोरों के लिए नॉर्मल टॉयलेट काउंट?
टीनएज में आमतौर पर दिन में 4 से 6 बार पेशाब करना सामान्य माना जाता है. लेकिन हार्मोनल बदलावों के चलते कुछ समय के लिए बार-बार पेशाब की दिक्कत हो सकती है. यह ज्यादातर मामलों में कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है. अगर लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे, तो यह मधुमेह या UTI का संकेत हो सकता है.
वयस्क (60 साल से कम)
डॉ. हामिद के अनुसार ज्यादातर वयस्क दिन में लगभग 5 से 8 बार और रात में एक बार पेशाब करते हैं. महिलाओं में यह संख्या पुरुषों से थोड़ी ज्यादा हो सकती है. गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का दबाव ब्लैडर पर पड़ता है, जिससे पेशाब आना की संख्या बढ़ जाती है. महिलाओं में UTI भी बहुत आम है और यही कारण है कि उन्हें अक्सर पेशाब के लिए जाना पड़ता है.
बुजुर्ग (60 वर्ष से अधिक)
उम्र बढ़ने के साथ हमारे शरीर की किडनी और ब्लैडर की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती है. इसी कारण बुजुर्गों में पेशाब रोके रखना मुश्किल हो सकता है. NHS के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में रात में दो बार तक पेशाब जाना नॉर्मल है. इसका कारण है शरीर में एंटीडाययूरेटिक हार्मोन (ADH) की कमी, जो पानी की मात्रा को कंट्रोल करता है. साथ ही, कई बुजुर्ग लोग डाययूरेटिक दवाएं लेते हैं, जो पेशाब की मात्रा को बढ़ा देती हैं. पुरुषों में बढ़ती उम्र के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है, जिससे ब्लैडर पर दबाव पड़ता है और पेशाब की बार-बार इच्छा होती है.
शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया … और पढ़ें
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