जबलपुर के किसान इन दिनों यूरिया खाद की किल्लत और अव्यवस्थित वितरण व्यवस्था से बेहद परेशान हैं। हालात यह हैं कि किसान सुबह 6 बजे से ही खाद लेने के लिए केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइनों में खड़े हो जाते हैं, लेकिन कई घंटे तक धूप में इंतज़ार करने के बाद भी उ
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किसानों का आरोप है कि वितरण केंद्रों पर उन्हें तरह-तरह के बहाने बनाकर लौटा दिया जाता है। कभी अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों में कमी बताई जाती है, तो कभी टोकन का नंबर नहीं लग पाता। किसान दिलीप कुमार लोधी ने बताया कि पहले तहसील से टोकन कटवाने को कहा जाता है, लेकिन खाद लेने के वक्त अचानक मूल दस्तावेज मांग लिए जाते हैं। फोटोकॉपी स्वीकार न किए जाने पर किसानों को वापस लौटना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
एक एकड़ खेत के लिए कम से कम तीन बोरी यूरिया की ज़रूरत होती है, लेकिन वितरण केंद्र पर उन्हें सिर्फ एक बोरी दी जा रही है। देवरी पटपरा से आए किसान समर सिंह ने कहा कि वे 40-50 किलोमीटर का सफर तय कर आए हैं, लेकिन एक बोरी यूरिया लेने में ही इतना खर्च हो जाता है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
सुबह से लाइन में लगने के बावजूद दोपहर तक उनका नंबर नहीं आया। अव्यवस्था का सीधा असर किसानों की लागत और मुनाफे पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि इतनी दूर से आने-जाने का किराया, समय की बर्बादी और खाद की सीमित उपलब्धता खेती को घाटे का सौदा बना रही है।
किसानों मांग की है प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर यूरिया की पर्याप्त और सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करे, ताकि उन्हें राहत मिल सके और सीजन की फसल पर संकट न आए।
