Satna News: सतना के एक साधारण परिवार की बेटी ने अपने संघर्ष, धैर्य और मजबूत इरादों से वह कर दिखाया, जिसका सपना देश के लाखों युवा देखते हैं. कृष्णानगर की रहने वाली भूमिका जैन ने UPSC 2025 की प्रतिष्ठित परीक्षा में 331वीं रैंक हासिल कर पूरे विंध्य क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है. तीन साल तक दिल्ली में रहकर कठिन तैयारी, दो बार असफलता और तीसरे प्रयास में मिली इस शानदार सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता.
साधारण परिवार से निकली असाधारण सफलता
भूमिका के पिता मनोज जैन शहर में कपड़ों का व्यवसाय करते हैं. उनकी फैमिली शॉप है. मां सृष्टि जैन भी परिवार में बेटी की पढ़ाई को लेकर हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहीं. एक सामान्य व्यापारी परिवार से आने वाली भूमिका ने अपनी मेहनत के दम पर यह साबित किया कि बड़े सपनों के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी होती है. अब उनकी इस उपलब्धि से पूरे परिवार और शहर में खुशी का माहौल है.
स्कूल से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का सफर
लोकल 18 से बातचीत में भूमिका ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई सतना के क्रिस्तकुला स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीए प्रोग्राम की पढ़ाई पूरी की. ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है और इसके लिए उन्होंने पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी पर फोकस किया. दिलचस्प बात ये कि उन्होंने किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के बजाय सिर्फ यूपीएससी को ही अपना लक्ष्य बनाया.
तीन साल का संघर्ष और तीसरे प्रयास में सफलता
उन्होंने तीन साल तक दिल्ली में रहकर लगातार मेहनत की. पहले दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 331वीं रैंक हासिल की.
सेल्फ स्टडी से मारी बाजी
भूमिका ने बताया, उन्होंने केवल पहले प्रयास में बेस मजबूत करने के लिए कोचिंग का सहारा लिया था. इसके बाद उन्होंने कोचिंग छोड़ दी और पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया. उनका मानना है कि अगर रणनीति सही हो और पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे तो घर बैठकर भी यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी की जा सकती है. भूमिका बोली कि तैयारी के दौरान सबसे जरूरी है कि सीमित लेकिन भरोसेमंद किताबों का चयन किया जाए और उन्हें बार-बार पढ़ा जाए. उन्होंने कई किताबें पढ़ने के बजाय कुछ प्रामाणिक पुस्तकों पर ही ध्यान केंद्रित किया और बार-बार उनका रिवीजन किया.
रोज 9 से 12 घंटे पढ़ाई और छोटे-छोटे टारगेट
भूमिका की दिनचर्या पूरी तरह पढ़ाई के लिए समर्पित थी. वह रोजाना औसतन 9 घंटे पढ़ाई करती थीं, जो परीक्षा के करीब आने पर 12 घंटे तक पहुंच जाती थी. सुबह जल्दी उठकर वह पहले पिछले दिन पढ़े हुए विषयों का रिवीजन करती थीं. इसके बाद पूरे दिन को छोटे-छोटे टारगेट्स में बांटकर पढ़ाई करती थीं. उनकी तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करना था. उनका मानना है कि नियमित टेस्ट देने से न सिर्फ आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि परीक्षा के पैटर्न को समझने में भी मदद मिलती है.
सोशल मीडिया का किया स्मार्ट इस्तेमाल
अक्सर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी सोशल मीडिया से दूरी बना लेते हैं, लेकिन भूमिका ने इसका स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल किया. वह टेलीग्राम ग्रुप्स से जुड़ी रहीं, जहां से उन्हें करंट अफेयर्स और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों की जानकारी मिलती थी. इससे उन्हें अपनी तैयारी को अपडेट रखने में मदद मिली. लोकल 18 से बातचीत में भूमिका के पिता मनोज कुमार जैन ने कहा कि ये उनके पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है. शुरू से ऐसा लगता था कि ये बड़ी हो कर कुछ न कुछ करेगी लेकिन ये उनकी एक्सपेक्टेशंस से भी ज्यादा था.
युवाओं के लिए दिया खास संदेश
यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भूमिका का संदेश है कि सफलता के लिए धैर्य और समय प्रबंधन बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि नौकरी करने वाले लोग भी अगर सही टाइम मैनेजमेंट करें तो इस परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं. भूमिका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को दिया है, जिन्होंने हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया. उन्होंने कहा कि बचपन में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह सिविल सेवा में जाएंगी लेकिन पढ़ाई में रुचि होने के कारण ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने यूपीएससी को अपना लक्ष्य बना लिया. अब वह आगे आने वाली जिम्मेदारियों को लेकर बेहद उत्साहित हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं.
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