मिलानो कॉर्टिना शीतकालीन खेलों में आइस डांस फाइनल के नतीजों को लेकर उठा विवाद अब औपचारिक अपील तक नहीं पहुंचेगा। अमेरिकी फिगर स्केटिंग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मैडिसन चॉक और इवान बेट्स के स्कोर को चुनौती नहीं देगा। फाइनल के बाद कुछ प्रशंसकों ने जजिंग को लेकर नाराजगी जताई थी और ऑनलाइन याचिका भी शुरू की थी।
बता दें कि पूरे सत्र में अपराजित रहे इस अमेरिकी जोड़े को फ्री डांस में अपने प्रदर्शन पर पूरा भरोसा था। उनका मानना था कि उन्होंने स्वर्ण पदक के लायक प्रस्तुति दी है। हालांकि अंतिम स्कोर में फ्रांस की जोड़ी लारेंस फ़ोर्नियर ब्यूड्री और गिलाउम सिज़ेरॉन ने कुल 225.82 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चॉक और बेट्स को 224.39 अंक मिले और वे रजत पदक तक सीमित रहे।
गौरतलब है कि विवाद का बड़ा कारण फ्री डांस में फ्रांसीसी जज जेज़ाबेल डाबुई द्वारा दिए गए अंक रहे, जिन्होंने फ्रांसीसी जोड़ी को अमेरिकी खिलाड़ियों की तुलना में लगभग आठ अंक अधिक दिए। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग संघ तथा अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से स्कोर की समीक्षा की मांग उठी।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय स्केटिंग संघ ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि उसे दिए गए अंकों पर पूर्ण विश्वास है और जजिंग प्रणाली में कई स्तर की समीक्षा व्यवस्था मौजूद है, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित की जाती है।
अमेरिकी संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैट फैरेल ने कहा कि मिलान में आइस डांस प्रतियोगिता को लेकर काफी विचारपूर्ण और भावनात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि खेलों के बाद चॉक और बेट्स के साथ मिलकर आगे की रणनीति और खेल के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा। हालांकि अपील की समयसीमा अब समाप्त हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि परिणाम यथावत रहेंगे।
जानकारों का मानना है कि आइस डांस जैसे तकनीकी खेलों में जजिंग को लेकर बहस नई नहीं है। फिर भी अमेरिकी जोड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में विश्वस्तरीय प्रदर्शन किया, जिसमें टीम इवेंट में स्वर्ण पदक दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। ऐसे में यह विवाद खेल भावना और पारदर्शिता पर व्यापक चर्चा को जन्म दे रहा है।
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