ग्वालियर नगर निगम परिषद की बैठक एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। मलाईदार पदों पर प्रतिनियुक्ति पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर हुए विवाद के बाद बैठक को अगली तारीख के लिए स्थगित कर दिया गया। यह मुद्दा पिछले तीन वर्षों से लगातार उठता रहा है,
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सोमवार को आयोजित परिषद की बैठक करीब पांच घंटे तक चली। इस दौरान भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास ने फाइलों को लहराते हुए कहा कि वर्ष 2023 में निगम परिषद के पास ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मौजूद है, जो महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ हैं। जब उनकी बात नहीं सुनी गई, तो वे धरने पर बैठ गए।
दरअसल, निगम में बड़ी संख्या में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी हैं, जो दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आकर सुविधाजनक पदों पर जमे हुए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने वर्ष 2015 में सभी नगर निगमों के लिए पदों का स्पष्ट सेटअप तय किया था। वर्ष 2016 में तत्कालीन आयुक्त अनय द्विवेदी ने इस सेटअप का सख्ती से पालन कराया था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद निगम फिर पुरानी व्यवस्था पर लौट आया।
वर्तमान में स्थिति यह है कि सब इंजीनियरों को उपायुक्त, क्लर्क और मीटर रीडरों को जोनल ऑफिसर, कर संग्रहकों को भवन शाखा का प्रभारी और निरीक्षक बना दिया गया है। पीएचई स्टाफ, जिसे पानी वितरण व्यवस्था देखनी चाहिए, वह भी निगम में ऊंचे पदों पर जमे हुए हैं।
यह स्थिति तब है, जब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच पहले ही ग्वालियर नगर निगम में 61 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में भेजने और खाली पदों को भरने के आदेश दे चुकी है। इन आदेशों का अब तक पालन नहीं हुआ है।
हंगामे के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी। अब अगली परिषद बैठक 2 फरवरी को बुलाई गई है। इस बैठक में आयुक्त को अब तक की कार्रवाई और आगे की योजना परिषद के सामने प्रस्तुत करनी होगी।
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