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LASIK Eye Surgery Limits: आजकल चश्मा हटवाने का ट्रेंड बढ़ गया है और बड़ी संख्या में लोग LASIK सर्जरी करवा रहे हैं. आई स्पेशलिस्ट की मानें तो लेसिक एक लेजर सर्जरी है, जिसमें कॉर्निया को रीशेप करके चश्मे का नंबर हटाया जाता है. यह बहुत सुरक्षित सर्जरी है और महज कुछ मिनट में हो जाती है. आमतौर पर -8.0 D तक के नंबर का चश्मा लेसिक के जरिए हटाया जा सकता है. बहुत ज्यादा नंबर वाले लोगों का चश्मा ICL जैसी तकनीक से हटाया जाता है.
LASIK Eye Surgery Safe Range: डिजिटल युग में अधिकतर लोगों की आंखों पर चश्मा लगने लगा है. आज के दौर में छोटे बच्चों को मायोपिया की समस्या हो रही है. यह आंखों से जुड़ी एक प्रॉब्लम है, जिसमें लोगों को दूर की चीजें साफ नजर नहीं आती हैं और इसके लिए नंबर वाला चश्मा लगाना पड़ता है. छोटे बच्चों और यंग लोगों को मायोपिया की समस्या सबसे ज्यादा होती है. इसमें लोगों की आंखों में माइनस नंबर आ जाता है और उन्हें साफ देखने के लिए चश्मे का सहारा लेना पड़ता है. हालांकि मेडिकल साइंस ने काफी तरक्की कर ली है और अब एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए चश्मे का नंबर हटाया जा सकता है. दुनियाभर में इस वक्त चश्मा हटाने के लिए LASIK सर्जरी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है. यह तकनीक भरोसेमंद है और लगातार एडवांस होती जा रही है. कई लोगों के चश्मे का नंबर -10 से भी ज्यादा होता है और ऐसे में उनके मन में अक्सर यह सवाल घूमता रहता है कि LASIK के जरिए कितने नंबर तक का चश्मा हटाया जा सकता है?
नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और LASIK स्पेशलिस्ट डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया कि अब चश्मा हटवाने के लिए कई तरह की सर्जरी की जाती हैं, जिनमें सबसे ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित LASIK है. यह एक रिफ्रेक्टिव आई सर्जरी है, जिसमें लेजर लाइट की मदद से कॉर्निया को रीशेप किया जाता है. इससे लोगों के चश्मे का नंबर हट जाता है और वे बिना चश्मे के साफ देख पाते हैं. मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया और एस्टिग्मेटिज्म के मरीजों का चश्मा लेसिक सर्जरी से हटाया जा सकता है. लेसिक सर्जरी भी कई तरह की होती है और मरीज की कंडीशन के अनुसार सर्जरी की जाती है. जिन लोगों के चश्मे का नंबर बहुत ज्यादा ज्यादा होता है, उनके लिए ICL जैसे इम्प्लांटेबल लेंस सर्जरी ठीक रहती है.
LASIK से कितने नंबर तक का चश्मा हट सकता है?
डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि मायोपिया यानी माइनस नंबर वाले लोगों की बात करें, तो LASIK सर्जरी से आमतौर पर -8.0 D तक का नंबर आसानी से हटाया जा सकता है. हाइपरमेट्रोपिया यानी पॉजिटिव नंबर वाले मरीजों की बात करें, तो लेसिक सर्जरी से +5.0 D नंबर का चश्मा सुरक्षित तरीके से हटा सकते हैं. एस्टिग्मेटिज्म यानी सिलिंड्रिकल नंबर के मामले में लेसिक 3.0 D तक कारगर रहती है. हालांकि लेसिक सर्जरी तभी की जाती है, जब मरीज की कॉर्निया की मोटाई 530 माइक्रोन (0.53 mm) या इससे ज्यादा हो. 495 माइक्रोन से कम कॉर्नियल थिकनेस वाले लोगों को LASIK सर्जरी कराने की सलाह नहीं दी जाती है. अगर कॉर्निया पतला है, तो लेसिक करने से यह कमजोर हो सकता है और भविष्य में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
अगर चश्मे का नंबर बहुत ज्यादा है, तब कैसे हटेगा?
आई स्पेशलिस्ट के मुताबिक जब किसी व्यक्ति के चश्मे का नंबर -8.0 D से ज्यादा होता है, तब ऐसी कंडीशन में लेसिक के बजाय इम्प्लांटेबल कॉलेमर लेंस (ICL) सर्जरी की सलाह दी जाती है. इस प्रक्रिया में सर्जरी के जरिए कॉलेमर लेंस को आपकी आंख के नेचुरल लेंस के सामने इम्प्लांट किया जाता है, जिससे चश्मे की जरूरत खत्म हो जाती है. इस लेंस के जरिए -20.0 D या इससे ज्यादा नंबर के चश्मे भी हटाए जा सकते हैं. ICL टेक्निक उन लोगों के लिए अच्छी मानी जाती है, जिनकी कॉर्निया पतली है या LASIK नहीं की जा सकती है. इस तरह हाई नंबर वाले चश्मों को भी आजकल हटाया जा रहा है.
किस उम्र के लोग हटवा सकते हैं अपना चश्मा?
डॉक्टर तुषार ने बताया कि LASIK या अन्य चश्मा हटाने वाली आई सर्जरी के लिए कम से कम 18 साल उम्र होनी चाहिए. इसके पहले चश्मे का नंबर अक्सर बदलता रहता है. जिन लोगों को नंबर ज्यादा होता है, उनका नंबर 22 साल तक भी बदल सकता है. ऐसे में सर्जरी से पहले कम से कम 6 महीने से 1 साल तक नंबर की प्रॉपर मॉनिटरिंग की जाती है. LASIK के लिए कोई अधिकतम उम्र नहीं है. कई बार 60 साल के लोग भी लेसिक करवाते हैं. हालांकि 20 से 40 साल की उम्र LASIK के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. इस दौरान लोग न केवल बिना चश्मे के देख पाते हैं, बल्कि उनका कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें