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Hanuman Jayanti News: टीकमगढ़ में अनोखा हनुमान मंदिर है. यहां बजरंगबली पेड़ की छाया में हैं. उन्हें खुले में रहना पसंद है. क्योंकि, कई बार यहां भक्तों ने छत बनवाने की कोशिश की, पर जब भी छत या छाया डाली जाती तेज आंधी में उड़ जाती. इस मंदिर को पातालपुरी हनुमानजी भी कहा जाता है, जानें क्यों…
टीकमगढ़ अनोखा हनुमान मंदिर.
Tikamgarh News: हनुमान जयंती पर देशभर के हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा है. इसी कड़ी में आज हम आपको टीकमगढ़ के एक अनोखे हनुमान मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. बड़ागांव का यह हनुमान मंदिर दुर्लभ है, क्योंकि यहां हनुमानजी खुले आसमान के नीचे पेड़ की छाया में रहना पसंद करते हैं. कोई यहां आज तक मंदिर की छत नहीं बनवा पाया. जिसने भी छाया या छत करने की कोशिश की तो तेज आंधी और हवा ने उसे उड़ा दिया.
ऐसी भी मान्यता है कि यहां विराजे हनुमानजी का एक पांव पाताल लोक तक गया है, जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. टीकमगढ़ से 30 किलोमीटर दूर बड़गांव में इस हनुमान मंदिर की अलग ही विशेषता है. यहां स्वयंभू मूर्ति के रूप में हनुमानजी विराजमान है. ऐसा कहा जाता है कि जब बजरंगबली ने बाल लीला के दौरान मुंह में सूरज को भर लिया था, तो उस समय वह जिस मुद्रा में खड़े थे, उसी रूप में यह यहां खड़े हुए हैं. साथ ही सूरज की ओर निहार रहे हैं.
पातालपुरी हनुमानजी नाम भी प्रसिद्ध
इस मंदिर की सबसे खास बात ये कि यहां आज तक कोई छत नहीं डाल पाया. क्योंकि, हनुमानजी महाराज खुले आसमान के नीचे रहना पसंद करते हैं. पेड़ की छाया में ही 24 घंटे रहते हैं. इनका एक पैर पाताल लोक तक भी गया है. इसलिए इन्हें पातालपुरी हनुमानजी के नाम से भी जाना जाता है.
खुदाई में नहीं निकला पैर
कहते हैं एक बार खुदाई के दौरान मूर्ति को दूसरी जगह स्थापित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन लोग खुदाई करते गए और प्रतिमा का पैर जमीन के अंदर से नहीं निकाल पाए, इसलिए खुदाई बंद कर दी. कुछ समय पहले किसी ने मंदिर बनकर छाया करने की कोशिश की थी, जैसे ही छत डालने की कोशिश की गई तो तेज हवा और आंधी तूफान ने छत को उड़ा दिया. ऐसा पहले कई बार हो चुका है. इसलिए अब ऐसा कहा जाता है कि यहां हनुमानजी महाराज को खुले आसमान की नीचे रहना ही पसंद है.
इस अद्भुत और चमत्कारी मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. आज हनुमान जयंती के खास मौके पर भगवान का जन्म उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. दूर-दूर से श्रद्धालु जन्मोत्सव के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ा गांव पहुंचते हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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