2 भाइयों की अनोखी जोड़ी; कभी साइकिल से किया सफर, आज करोड़ों का कारोबार

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा के दो भाइयों ने मेहनत, ईमानदारी और लगन के दम पर एक ऐसा कारोबार खड़ा किया है, जो आज पूरे निमाड़ क्षेत्र में पहचान बन चुका है. कभी साइकिल से काम पर जाने वाले अरुण सेठी और आलोक सेठी ने छोटे से व्यवसाय से शुरुआत कर आज करोड़ों के टर्नओवर वाला बड़ा बिजनेस खड़ा कर दिया है. दोनों भाइयों की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. खंडवा के हिंदुस्तान अभिकरण के मालिक अरुण सेठी और आलोक सेठी ने अपने पिता के साथ मिलकर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से शुरुआत की थी. उस समय देवनारायण चौक (पहले जलेबी चौक) में उनकी एक छोटी सी दुकान हुआ करती थी. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों भाइयों ने अपने पिता के साथ व्यापार में हाथ बंटाना शुरू किया. धीरे-धीरे ट्रांसपोर्ट का काम बढ़ाया और ट्रकों की संख्या भी बढ़ती गई.

व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए दोनों भाइयों ने नया कदम उठाया. आलोक सेठी ने भवानी माता रोड पर एक छोटी सी किराये की दुकान में टायर का काम शुरू किया. धीरे-धीरे ट्रांसपोर्ट और टायर दोनों कारोबार को साथ लेकर आगे बढ़ते रहे. बाद में उन्होंने बुरहानपुर और हरदा जैसे शहरों में भी अपने कारोबार का विस्तार किया.

ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी बढ़ाया कदम
समय के साथ परिवार की नई पीढ़ी भी व्यापार से जुड़ती गई. अरुण सेठी के बेटे पलाश, जो ऑटोमोबाइल इंजीनियर हैं, की मेहनत से परिवार को होंडा की डीलरशिप मिली. आज उनका होंडा शोरूम देश के बड़े शोरूम में गिना जाता है और हर साल कंपनी से अवॉर्ड भी प्राप्त करता है. इसके बाद उन्होंने टोयोटा शोरूम के क्षेत्र में भी कदम रखा.

संघर्ष से मिली सफलता
लोकल 18 से बातचीत में अरुण सेठी बताते हैं कि उन्हें जीवन में सबसे बड़ी सीख अपने पिता कमलचंद सेठी से मिली. उन्होंने हमेशा मेहनत, ईमानदारी और लगन से काम करने की सलाह दी. अरुण सेठी ने खंडवा के एसएन कॉलेज से एमए और एलएलबी की पढ़ाई की है. वह कॉलेज के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे और राजनीति में भी सक्रिय रहे. इसके अलावा उन्हें बागवानी का भी शौक है.

परिवार की जड़ों से जुड़ी कहानी
वहीं आलोक सेठी बताते हैं कि उनके दादाजी मूल रूप से राजस्थान से थे. अकाल के समय वह खंडवा आकर बस गए थे. उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी और वह एक छोटे से टिन के मकान में रहते थे. उनके माता-पिता ने हमेशा बच्चों को पढ़ाई और अच्छे संस्कार देने पर जोर दिया. परिवार में मेहनत और नैतिकता की सीख ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी रही.

आज भी सादगी भरा जीवन
आज अरुण सेठी और आलोक सेठी का कारोबार खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, खरगोन और बड़वानी सहित कई जिलों में फैला हुआ है, इसके बावजूद पूरा परिवार आज भी सादगी भरा जीवन जीता है और जमीन से जुड़ा हुआ है. आलोक सेठी कहते हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. अगर ईमानदारी से काम किया जाए और ग्राहक का विश्वास जीता जाए, तो कारोबार धीरे-धीरे खुद एक ब्रांड बन जाता है.

युवाओं के लिए संदेश
दोनों भाइयों का मानना है कि जीवन में हमेशा सीखते रहना जरूरी है. अगर व्यक्ति मेहनत और लगन के साथ अपने काम में लगा रहे, तो सफलता देर से ही सही लेकिन जरूर मिलती है. खंडवा जैसे छोटे शहर से निकलकर पूरे प्रदेश में कारोबार फैलाने वाले इन दो भाइयों की कहानी आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

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