बिना मिलावट वाली देसी मिठाई, आटे और गुड़ का गजब जोड़, एक बार खाया… तो बार-बार मांगेंगे

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Sidhi Local Food: विंध्य क्षेत्र की पारंपरिक रसोई से निकली खास मिठाई गुलगुले अपने अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है. गेहूं के आटे और गुड़ से बनने वाले गुलगुले, जिन्हें मीठा पुआ भी कहा जाता है, बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम-जालीदार होते हैं. सर्दियों में इनकी मिठास लोगों को खूब भाती है.

Sidhi Local Food: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की पारंपरिक रसोई अपने अनोखे और देसी स्वाद के लिए जानी जाती है. यहां जब भी मीठे व्यंजनों की बात होती है, तो गुलगुला का नाम सबसे ऊपर आता है. यह ऐसा पारंपरिक पकवान है, जो खास अवसरों के साथ-साथ रोजमर्रा की मीठी तलब को भी पूरी करता है. गेहूं के आटे और गुड़ से बनने वाला गुलगुला स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ सेहत के लिहाज से भी लाभकारी माना जाता है. गुलगुला देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसका स्वाद बेहद खास होता है. यह इडली की तरह सॉफ्ट और अंदर से नरम होता है.

रसोइया प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को बताया कि गुलगुला बनाने की विधि बेहद आसान है. सबसे पहले गेहूं के आटे को गुड़ के पानी में अच्छे से घोला जाता है. इसके बाद इसमें स्वाद और खुशबू के लिए सौंफ और बारीक कद्दूकस किया हुआ नारियल मिलाया जाता है. तैयार घोल को कुछ देर के लिए रख दिया जाता है. फिर छोटे-छोटे आकार में इसे गर्म तेल में धीमी आंच पर तला जाता है. शुरू में गुलगुलों का रंग हल्का रहता है, लेकिन धीरे-धीरे वे सुनहरे बादामी रंग में बदल जाते हैं, जो इनके तैयार होने का संकेत होता है.

पाचन के लिए बढ़िया
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. आरपी पौराहा के अनुसार, गुलगुला केवल स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि पाचन के लिए भी लाभकारी है. इसमें इस्तेमाल होने वाला गुड़ और सौंफ पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं. यह बिना किसी कृत्रिम मिठास या प्रिजर्वेटिव के बनता है, इसलिए इसे घर पर बनाना पूरी तरह सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक है.

सीधी में यहां फेमस दुकान
आज गुलगुला केवल घरों तक सीमित नहीं है. इसकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण यह अब गांवों और शहरों के बाजारों में भी बिकने लगा है. सीधी के चौक बाजार पर सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक एक ठेले पर गुलगुलों की दुकान सजती है, जहां लोग गरमागरम गुलगुलों का स्वाद लेते नजर आते हैं. गुलगुला विंध्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती गांवों में भी यह आम घरेलू व्यंजन के रूप में बनाया जाता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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