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UGC News Update:UGC के नए नियमों को लेकर उज्जैन में संत समाज और सवर्ण समाज का गुस्सा सड़कों पर दिखा. साधु-संतों ने चेतावनी दी है कि अगर शिक्षा को जाति से जोड़ने वाले नियम वापस नहीं हुए तो बड़ा आंदोलन होगा. UGC का कहना है कि नियम समानता के लिए हैं, लेकिन विरोध करने वालों को इसमें भेदभाव की आशंका दिख रही है. संतों का तर्क है कि योग्यता और प्रतिभा के आधार पर शिक्षा होनी चाहिए, न कि जाति के नाम पर. यह विवाद अब केवल शिक्षा नीति नहीं, बल्कि सामाजिक एकता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.
शुभम मरमट / उज्जैन. देशभर में UGC के नए नियमों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. अब इस मुद्दे पर सिर्फ स्वर्ण समाज ही नहीं, बल्कि अखाड़ों से जुड़े साधु-संत और महंत भी खुलकर सामने आ गए हैं. उज्जैन में संतों ने साफ कहा है कि अगर छात्रों के हित में इन नियमों में बदलाव नहीं हुआ, तो वे भी सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे. खास बात यह है कि विरोध कर रहे कई संत केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं हैं. इनमें से कई संत एमकॉम, एमए, मैनेजमेंट, मार्केटिंग और यहां तक कि पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा हासिल कर चुके हैं. उनका कहना है कि शिक्षा को जाति से जोड़ना समाज और देश दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
उज्जैन से संतों की दो टूक चेतावनी
पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि शिक्षा का आधार प्रतिभा, मेहनत और साधना होनी चाहिए, न कि जाति. उन्होंने कहा कि देश आज़ादी के 77 साल पूरे कर चुका है, लेकिन अगर छात्र जीवन से ही जातिगत सोच भर दी गई, तो यह आने वाले कल के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. वहीं, बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत सत्यानंद ने भी UGC की नई गाइडलाइन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. योग में एमए और राजनीति शास्त्र में स्नातक कर चुके महंत सत्यानंद का कहना है कि शिक्षक और छात्र की पहचान उनकी योग्यता और व्यवहार से होती है, न कि जाति से. अगर छात्रों के मन में जातिवाद का ज़हर बोया गया, तो इसके गंभीर नतीजे देश को भुगतने पड़ेंगे.
सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज
UGC नियमों के विरोध में उज्जैन शहर में भी जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. बुधवार शाम टावर चौक से शहीद पार्क तक स्वर्ण समाज के लोग बड़ी संख्या में जुटे और करीब दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने UGC संशोधन को “काला कानून” बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की. इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलगुरु शैलेंद्र कुमार शर्मा और जिला प्रशासन को सौंपा गया. इस प्रदर्शन में कई साधु-संतों की मौजूदगी ने आंदोलन को और धार दे दी.
आखिर क्या है UGC का नया नियम?
दरअसल, UGC ने 13 जनवरी 2026 से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाने के उद्देश्य से नया नियम लागू किया है. इसके तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक समानता समिति बनाई जाएगी, जिसमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि होंगे. यह समिति हर छह महीने में अपनी रिपोर्ट UGC को सौंपेगी. लेकिन इस समिति में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि को शामिल न किए जाने को लेकर विरोध हो रहा है.सवर्ण समाज का कहना है कि इस नियम का गलत इस्तेमाल हो सकता है और झूठे आरोपों के जरिए छात्रों और शिक्षकों को परेशान किया जा सकता है. यही वजह है कि अब यह मामला सिर्फ नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े सामाजिक आंदोलन की शक्ल लेता दिख रहा है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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