पाकिस्तान से भारत आए थे दो भाई, ठेले से बेची मिठाई, आज खड़ा किया 600 करोड़ का बिजनेस

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Success Story: सपने तो कई लोग देखते हैं लेकिन कुछ लोगों में ही उस सपने को पूरा करने की हिम्मत होती है. आज हम आपको एक ऐसी सक्सेस स्टोरी बताने जा रहे हैं जो दो भाइयों की है. उन्होंने एक छोटी से ठेले से दुकान बनाई और इसके बाद 600 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया.

गुरुग्राम की चमकती हुई इमारतों और गलियों में खाने की खुशबू बिखेरते स्ट्रीट वेंडर्स के बीच एक मिठाई की दुकान ऐसी है, जो हर किसी के दिल में बसती है. जी हां, हम बात कर रहे हैं ओम स्वीट्स की, जिसे कठूरिया परिवार ने अपनी मेहनत और मिठास से 600 करोड़ रुपये का कारोबार बना दिया.

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यह कहानी सिर्फ मिठाई की नहीं, बल्कि हौसले, मेहनत और अपने जड़ों से जुड़े रहने की है. कठूरिया भाइयों ने पाकिस्तान के मुल्तान से भारत आकर एक छोटी सी दुकान से शुरुआत की और आज दिल्ली-एनसीआर में 20 दुकानों के साथ ‘दोडा बर्फी’ के बादशाह बन गए.

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इस कहानी की शुरुआत आजादी से पहले मुल्तान में होती है, जहां कठूरिया परिवार सोहन हलवा बनाकर अपनी आजीविका चलाता था. उनके पास सिर्फ यही एक हुनर था, और उन्होंने इसे पूरे दिल से निखारा. 1947 में बंटवारे के बाद परिवार को भारत आना पड़ा. गुरुग्राम के अर्जुन नगर में उन्होंने एक छोटा सा सोहन हलवा का ठेला शुरू किया.

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जिंदगी आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. जब परिवार के मुखिया का देहांत हुआ, तो बड़े भाई ओम प्रकाश ने पढ़ाई छोड़कर परिवार की जिम्मेदारी संभाली. उनकी मेहनत ने ठेले को एक छोटी दुकान में बदला, जो धीरे-धीरे बड़ा नाम बन गया.

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आज ओम स्वीट्स की मेन्यू में 600 से ज्यादा चीजें हैं. इसमें क्रिस्पी डोसा, चटपटा चाउमीन, रसीली रसमलाई और सबसे खास, उनकी ‘दोडा बर्फी’ शामिल है. यह बर्फी सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि लोगों के लिए एक जज्बात है. इसमें खास ‘अंगूरी गेहूं’ का इस्तेमाल होता है, जो इसे अनोखा स्वाद देता है. हर दिन 10,000 किलो बर्फी बिकती है और त्योहारों में यह आंकड़ा पांच गुना बढ़ जाता है. लोग इसकी मिठास के दीवाने हैं.

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कठूरिया भाइयों, अंकित और करण, ने इस बिजनेस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उन्होंने दुकान में आटा गूंथने से लेकर काउंटर पर ग्राहकों को सर्व करने तक हर काम सीखा. आज ओम स्वीट्स के पास आधुनिक दुकानें, ऑनलाइन डिलीवरी और दुबई, कतर जैसे देशों में निर्यात है.

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उन्होंने थंडाई पर्ल्स और बिस्कॉफ बर्फी जैसे नए प्रोडक्ट्स जोड़कर परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ा. बिकानेरवाला और हल्दीराम जैसे बड़े नामों के बीच ओम स्वीट्स ने अपनी जगह लोगों के भरोसे और मुंह की बात से बनाई.

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यहां एक कटोरी छोले सिर्फ 25 रुपये में मिलती है, जो हर वर्ग के लिए सस्ती और स्वादिष्ट है. कठूरिया परिवार का मानना है कि हर ग्राहक को एक जैसा प्यार और मिठास मिलनी चाहिए. ओम स्वीट्स की कहानी सिर्फ कारोबार की नहीं, बल्कि अपनी जड़ों को सहेजने और बदलते वक्त के साथ चलने की है. हर मिठाई में उनकी मेहनत और इतिहास की मिठास है. यह कहानी हर उस इंसान को प्रेरित करती है, जो छोटे से शुरू करके बड़ा सपना देखता है.

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पाकिस्तान से भारत आए थे दो भाई, ठेले से बेची मिठाई, आज है 600 करोड़ का बिजनेस

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