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Tulsi Plant Tips And Tricks: अगर आपके घर की तुलसी भी सूख रही हैं तो जरूर देखभाल में कोई गलती हो रही है. यहां जानें कि तुलसी को हर मौसम में कैसे हराभरा रखें.
सही मिट्टी का चुनाव
तुलसी का पौधा ऐसी मिट्टी में ज्यादा पनपता है, जहां पानी देर तक रुका न रहे. अगर आप गमले में तुलसी लगा रहे हैं तो मिट्टी में बगीचे की सामान्य मिट्टी के साथ गोबर की खाद और थोड़ी रेत जरूर मिलाएं. इस मिश्रण से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलेगा और जड़ें आसानी से फैल पाएंगी. ध्यान रखें कि मिट्टी हल्की और भुरभुरी हो, क्योंकि भारी मिट्टी में पौधे की जड़ें सांस नहीं ले पातीं और पौधा जल्दी मुरझाने लगता है.
तुलसी के लिए कम से कम आठ से दस इंच गहरा गमला होना चाहिए. गमले के नीचे पानी निकलने का छेद होना जरूरी है. अगर पानी गमले में जमा हो गया तो जड़ें सड़ सकती हैं और पौधा धीरे-धीरे सूख जाएगा. मिट्टी डालने से पहले गमले के छेद पर टूटी हुई ईंट या कंकड़ जरूर रखें, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके.
रोपाई का सही तरीका
तुलसी के पौधे को सीधे गमले में लगाने से पहले यदि बीज से उगाना चाहते हैं तो बीज को एक छोटे पात्र में बो दें और जब उसमें छोटे-छोटे पौधे निकल आएं, तब उन्हें गमले में रोपें. अगर सीधे पौधा लाकर लगाना है तो जड़ों को ज्यादा न दबाएं. पौधे के चारों ओर मिट्टी हल्के हाथ से भरें और फिर पानी दें.
तुलसी को धूप बहुत पसंद है. कोशिश करें कि गमला ऐसे स्थान पर रखें जहां रोजाना कम से कम चार से पांच घंटे सीधी धूप मिले. सुबह की धूप तुलसी के लिए सबसे अच्छी होती है, जहां तक पानी का सवाल है तो तुलसी को रोजाना हल्का पानी चाहिए. लेकिन, ध्यान रहे कि मिट्टी में पानी भरकर कीचड़ न बने. गर्मियों में रोजाना और सर्दियों में एक दिन छोड़कर पानी देना पर्याप्त है. बरसात के मौसम में तभी पानी दें जब मिट्टी सूखी हुई हो.
खाद और पोषण
हर पंद्रह दिन में तुलसी को ऑर्गेनिक खाद देना जरूरी है. आप गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी-कम्पोस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं. रासायनिक खाद से बचना चाहिए क्योंकि तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल पूजा और दवाई दोनों में किया जाता है. अगर पौधे की पत्तियां पीली पड़ रही हों तो समझ लें कि उसे अतिरिक्त पोषण की जरूरत है.
रोग और कीट से बचाव
कभी-कभी तुलसी पर छोटे-छोटे कीड़े लग जाते हैं. इन्हें हटाने के लिए रासायनिक दवा का उपयोग न करें. इसके बजाय घर पर बना नीम का पानी या छाछ का छिड़काव करें. इससे पौधा सुरक्षित रहेगा और पत्तियों पर कोई हानिकारक असर भी नहीं पड़ेगा.
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