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घर में लगा तुलसी का पौधा अगर जल्दी कमजोर हो रहा है या लंबा होकर सूखने लगा है, तो इसकी सबसे बड़ी वजह नियमित कटाई न होना हो सकती है. सही तरीके से ऊपर से पत्तियां तोड़ते रहने से तुलसी झाड़ीदार बनती है और नई-नई शाखाएं निकलती हैं. वहीं, पौधे में फूल आते ही उन्हें हटा देना चाहिए, क्योंकि फूल आने के बाद तुलसी की बढ़वार रुक जाती है और पौधा धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है.
भारतीय घरों में तुलसी का पौधा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. अक्सर देखा जाता है कि सर्दी या गर्मी के मौसम में तुलसी का पौधा सूखने लगता है, जिससे लोग परेशान हो जाते हैं. यदि थोड़ी-सी सही देखभाल की जाए, तो तुलसी का पौधा साल भर हरा-भरा और स्वस्थ बना रह सकता है.

गार्डनिंग के क्षेत्र में 25 साल का अनुभव रखने वाले राजीव कुमार (गार्डनर एस बी डिग्री कॉलेज रायबरेली) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि तुलसी के पौधे के लिए सही जगह का चयन बेहद जरूरी है. इसे ऐसी जगह रखें जहां सुबह की धूप आसानी से मिल सके. तुलसी को रोजाना 4 से 5 घंटे धूप की जरूरत होती है,

तेज दोपहर की धूप से इसे बचाना चाहिए, खासकर गर्मियों में, घर में गमले में तुलसी लगा रहे हैं तो गमले में पानी निकासी के लिए छेद जरूर होने चाहिए.
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पानी देने का तरीका भी तुलसी की सेहत के लिए अहम है. तुलसी को न ज्यादा पानी चाहिए और न ही बहुत कम मिट्टी सूखने पर ही पानी दें. सर्दियों में सप्ताह में 2 से 3 बार और गर्मियों में जरूरत के अनुसार पानी देना पर्याप्त होता है. अधिक पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं, जिससे पौधा खराब हो जाता है.

तुलसी को पोषण देने के लिए समय-समय पर जैविक खाद का प्रयोग करें. महीने में एक बार गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना फायदेमंद रहता है. इसके अलावा चाय की पत्ती, केले के छिलके का पानी या छाछ को पानी में मिलाकर देने से भी पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं.

तुलसी के पौधे की नियमित कटाई भी जरूरी है. ऊपर से पत्तियां तोड़ते रहने से पौधा झाड़ीदार बनता है और नई शाखाएं निकलती हैं. फूल आने पर उन्हें तोड़ देना चाहिए, क्योंकि फूल आने के बाद पौधा कमजोर पड़ने लगता है.

तुलसी के पौधे पर कीट एवं रोग लगने का खतरा भी अधिक रहता है. ऐसे में जरूरी है किकीट-रोग से बचाव के लिए नीम का तेल या नीम का पानी छिड़काव करना लाभकारी होता है. इससे पौधा सुरक्षित रहता है और रासायनिक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती.
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