‘आइस्क्रीम’ और ‘हैमबर्गर’ पर उखड़ा तानाशाह किम जोंग-उन, जारी किया तुगलकी फरमान

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Kim Jong-Un News: नॉर्थ कोरिया में तानाशाह किम जोंग-उन ने ‘आइस्क्रीम’, ‘हैमबर्गर’, ‘कराओके’ जैसे वेस्टर्न शब्दों पर पाबंदी लगा दी है.

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन (फाइल फोटो: रॉयटर्स)
North Korea News: प्योंगयांग से एक अजीबोगरीब खबर आई है. नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने अब आम शब्दों पर भी शिकंजा कस दिया है. उन्होंने ‘आइस्क्रीम’, ‘हैमबर्गर’ और ‘कराओके’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है. वजह बताई गई है कि ये शब्द ‘बहुत ज्यादा वेस्टर्न’ हैं और देश की संस्कृति पर विदेशी असर डालते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया के नए बीच-रिसॉर्ट वोनसन में काम कर रहे टूर गाइड्स को साफ आदेश दिया गया है कि वे विदेशी या साउथ कोरियाई शब्दों का इस्तेमाल न करें. उन्हें सरकार द्वारा चलाए जा रहे ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया गया है, जहां उन्हें आधिकारिक नारों और स्वीकृत शब्दों को याद करना पड़ रहा है.

‘वेस्टर्न नहीं, देसी नाम बोलने होंगे’

किम जोंग-उन के फरमान के बाद, ‘हैमबर्गर’ को ‘दाजिन-गोगी ग्योप्पांग’ यानी ‘डबल ब्रेड विद ग्राउंड बीफ’ कहना होगा. ‘आइस्क्रीम’ को ‘एसेकिमो’ और ‘कराओके मशीन’ को ‘ऑन-स्क्रीन अकंपनिमेंट मशीन’ नाम दिया गया है. सरकार का कहना है कि ये बदलाव ‘नॉर्थ कोरियाई शब्दावली’ को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक घुसपैठ रोकने के लिए हैं.

पहले भी जारी हुए हैं अजीब नियम

यह कोई पहली बार नहीं है जब नॉर्थ कोरिया के अजीब फरमानों ने दुनिया का ध्यान खींचा हो. यहां साधारण सी बातों पर भी सख्त सजा दी जाती है. हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने खुलासा किया कि कई लोगों को विदेशी फिल्में और टीवी शो देखने पर मौत की सजा दी गई. एक महिला, जो 2023 में देश से भाग निकली, ने बताया कि उसकी तीन सहेलियों को सिर्फ साउथ कोरियाई ड्रामे रखने के आरोप में सार्वजनिक रूप से मार दिया गया.

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट ने भी इस माहौल पर गंभीर चिंता जताई है. इसमें कहा गया कि 2014 के बाद से नॉर्थ कोरिया में दमन और बढ़ा है. विदेशी मीडिया देखने वालों के खिलाफ घर-घर छापे मारे जाते हैं. सख्त सजा दी जाती है. यहां तक कि कई मामलों में सार्वजनिक फांसी भी दी गई. रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार जानबूझकर ऐसे मुकदमे चलाती है ताकि लोगों में डर बैठाया जा सके.

विदेशी मीडिया के जुनून में जान की बाजी लगा रहे लोग

2015 से ही नॉर्थ कोरिया ने सख्त कानून पास किए, जिनमें दुश्मन देशों के मीडिया का इस्तेमाल अपराध माना गया. 2018 से कार्रवाई और तेज हुई. 2020 के बाद सजा और भी कठोर हो गई. महामारी के समय कुछ लोग रिश्वत देकर बच निकले, लेकिन अब सरकार ने फिर से सख्ती बढ़ा दी है. खास टास्क फोर्स घरों की तलाशी लेती है और ‘एंटी-सोशलिस्ट’ मटीरियल पकड़े जाने पर कठोर कार्रवाई होती है.

खतरे के बावजूद नॉर्थ कोरिया के लोग चुपचाप विदेशी कंटेंट तक पहुंचने की कोशिश करते रहते हैं. कई लोग स्मगल किए गए USB स्टिक से कोरियाई ड्रामे देखते हैं या अवैध रेडियो प्रसारण सुनते हैं. सजा का डर हमेशा सिर पर मंडराता है, लेकिन बाहरी दुनिया को जानने की जिज्ञासा इन्हें रोक नहीं पाती.

Deepak Verma

Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He…और पढ़ें

Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He… और पढ़ें

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