जौनपुर. हमारे शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी होने पर उसके लक्षण साफ दिखाई देते हैं. विटामिन B12 ऐसा है पोषक तत्व है, जो हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है. ये लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, तंत्रिका तंत्र के सुचारू संचालन और डीएनए संश्लेषण में मदद करता है. साल्वेशन हॉस्पिटल जौनपुर के डायरेक्टर डॉ. विवेक श्रीवास्तव बताते हैं कि आजकल असंतुलित जीवनशैली, फास्ट फूड और पोषण की कमी के कारण लोगों में विटामिन B12 की कमी तेजी से देखने को मिल रही है. यह कमी धीरे-धीरे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है, इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और उपचार करना बेहद जरूरी है.
नजरअंदाज करना कितना भारी
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, विटामिन B12 की कमी के प्रमुख लक्षण हैं– लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना, हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, स्मरण शक्ति और ध्यान में कमी, सांस फूलना, चक्कर आना, त्वचा का पीला या फीका पड़ जाना, जीभ में सूजन या जलन, और कभी-कभी मुंह में छाले होना. ये लक्षण अक्सर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और लोग इन्हें सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इसकी कमी के मुख्य कारणों में शाकाहारी आहार प्रमुख है, क्योंकि विटामिन B12 मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है. लंबे समय तक पेट की दवाएं या एसिडिटी की दवाएं लेने से शरीर में विटामिन का अवशोषण कम हो सकता है. बढ़ती उम्र, आंतों से संबंधित बीमारियां और पोषण की कमी भी इस समस्या को बढ़ाती हैं.
ये रहा बचाव का सबसे अच्छा तरीका
डॉ. श्रीवास्तव ने इसे सही करने के कई उपाय बताए. वे कहते हैं कि सबसे पहले अपने खान-पान में सुधार लाना जरूरी है. इसके लिए आहार में अंडे, दूध, दही, पनीर, मछली, चिकन और सहित भोजन शामिल करें. शाकाहारी लोग फोर्टिफाइड सीरियल्स, सोया उत्पाद और न्यूट्रिशनल यीस्ट का सेवन कर सकते हैं. अगर कमी ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन B12 सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन लेना चाहिए. अगर समय रहते इसकी जांच और इलाज न कराया जाए, तो ये एनीमिया और तंत्रिका तंत्र की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. साल्वेशन हॉस्पिटल जौनपुर में विटामिन और हेमेटोलॉजी से संबंधित सभी जांच और उपचार की आधुनिक सुविधा उपलब्ध है. डॉ. विवेक श्रीवास्तव कहते हैं कि लोग अपने खान-पान पर ध्यान दें, समय-समय पर ब्लड टेस्ट कराते रहें और थकान, झुनझुनी या याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षणों को हल्के में न लें. समय पर जागरूकता और सही आहार ही इस समस्या से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है.