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Health Tips: रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ के अनुसार, मिट्टी के बर्तनों में धीरे-धीरे पका खाना पौष्टिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होता है, साथ ही एसिडिटी भी संतुलित रहती है. जानें और फायदे…
रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ के अनुसार, मिट्टी के बर्तनों में धीरे-धीरे पका भोजन ज्यादा पौष्टिक होता है. इसमें आयरन, कैल्शियम, सल्फर, फॉस्फोरस, पोटेशियम, जिंक और मैग्नीशियम जैसे तत्व भोजन में शामिल हो जाते हैं, जिससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं नहीं होतीं. हालांकि, इन बर्तनों का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं.
मिट्टी के बर्तन को इस्तेमाल से पहले पानी में भिगोकर सुखाना चाहिए और हल्की आंच पर 2 मिनट तक गर्म करना चाहिए. खाना पकाते समय लकड़ी या सिलिकॉन की कड़छी का इस्तेमाल करें ताकि पोषक तत्व सुरक्षित रहें. मिट्टी के बर्तनों में हमेशा कम आंच पर खाना पकाना बेहतर है, क्योंकि तेज आंच से बर्तन टूट सकते हैं.
ऐसे करें सफाई
सफाई करते समय मुलायम स्क्रब और नमक का उपयोग करें. साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि मिट्टी के बर्तन छिद्रयुक्त (porous) होते हैं और डिटर्जेंट इसमें जमकर बाद में खाने में मिल सकता है.
इतने फायदे भी
आगे बताया, मिट्टी के बर्तन अल्कलाइन होते हैं, जो खाने की एसिडिटी को संतुलित करते हैं. इनमें पका भोजन देर तक गर्म रहता है, तेल की जरूरत भी कम पड़ती है और खाने में एक सौंधी खुशबू आती है. इस तरह मिट्टी के बर्तनों में बना भोजन न केवल स्वादिष्ट बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी होता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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