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Benefits of Panchakarma Therapy: बागेश्वर में पंचकर्म चिकित्सा की मांग बढ़ रही है. पंचकर्म शरीर को डिटॉक्स करता है और त्रिदोषों को संतुलित करता है. जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. निष्ठा कोहली शर्मा ने इसके फायदों …और पढ़ें
हाइलाइट्स
- पंचकर्म शरीर को डिटॉक्स करता है.
- बागेश्वर में पंचकर्म चिकित्सा की मांग तेजी से बढ़ रही है.
- पंचकर्म से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
बागेश्वर: आयुर्वेद भारत की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणाली है, जो न केवल शरीर बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि पर भी बल देती है. इसी प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पंचकर्म है. जो आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में फिर से लोगों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है. पंचकर्म संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है पाँच क्रियाएं. ये क्रियाएं शरीर में जमे विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने, त्रिदोषों (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करने और शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने का कार्य करती हैं.
क्या होता है पंचकर्म?
पंचकर्म की प्रमुख पांच विधियां होती हैं.
• वमन: यह प्रक्रिया उल्टी के माध्यम से शरीर से अतिरिक्त कफ निकालने के लिए की जाती है.
• विरेचन: दस्त द्वारा शरीर से पित्त दोष को बाहर निकाला जाता है.
• बस्ति: औषधीय एनिमा द्वारा वात दोष की शुद्धि की जाती है.
• नस्य: नाक में औषधि डालकर सिर और साइनस की सफाई की जाती है.
• रक्तमोक्षण: यह रक्त की अशुद्धियों को दूर करने की प्रक्रिया है.
बागेश्वर में क्यों बढ़ रही है मांग?
उत्तराखंड के शांत, हरियाली से भरपूर और प्राकृतिक वातावरण वाले जिलों जैसे बागेश्वर में पंचकर्म चिकित्सा का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यहां के स्थानीय आयुर्वेदिक केंद्रों में बड़ी संख्या में लोग मानसिक तनाव, थकान, अनिद्रा, गठिया, मोटापा, त्वचा रोग और पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पंचकर्म की ओर रुख कर रहे हैं.
उत्तराखंड के शांत, हरियाली से भरपूर और प्राकृतिक वातावरण वाले जिलों जैसे बागेश्वर में पंचकर्म चिकित्सा का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यहां के स्थानीय आयुर्वेदिक केंद्रों में बड़ी संख्या में लोग मानसिक तनाव, थकान, अनिद्रा, गठिया, मोटापा, त्वचा रोग और पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पंचकर्म की ओर रुख कर रहे हैं.
डॉक्टर भी बता रहे इसके फायदे
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. निष्ठा कोहली शर्मा बताती हैं कि पंचकर्म सिर्फ एक इलाज नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली सुधारने की प्रक्रिया है. यह न केवल शरीर को अंदर से शुद्ध करता है, बल्कि मन को भी स्थिरता और स्फूर्ति प्रदान करता है. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ती है, त्वचा दमकती है, वजन नियंत्रित होता है और व्यक्ति स्वयं को ऊर्जावान महसूस करता है. आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि यदि साल में एक बार भी पंचकर्म कराया जाए, तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है.
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जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. निष्ठा कोहली शर्मा बताती हैं कि पंचकर्म सिर्फ एक इलाज नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली सुधारने की प्रक्रिया है. यह न केवल शरीर को अंदर से शुद्ध करता है, बल्कि मन को भी स्थिरता और स्फूर्ति प्रदान करता है. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ती है, त्वचा दमकती है, वजन नियंत्रित होता है और व्यक्ति स्वयं को ऊर्जावान महसूस करता है. आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि यदि साल में एक बार भी पंचकर्म कराया जाए, तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है.
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पंचकर्म सेंटर बना सेहतमंद जीवन का ठिकाना
बागेश्वर जिले में पंचकर्म चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए जिला आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग की ओर से मजियाखेत में एक वैलनेस पंचकर्म सेंटर की स्थापना की गई है. इस केंद्र में प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सकों की देखरेख में पंचकर्म की सभी प्रक्रियाएं कराई जाती हैं. यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कक्ष, स्टीम बाथ सुविधा, हर्बल औषधियों से उपचार और विशेष डाइट की व्यवस्था भी उपलब्ध है.
बागेश्वर जिले में पंचकर्म चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए जिला आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग की ओर से मजियाखेत में एक वैलनेस पंचकर्म सेंटर की स्थापना की गई है. इस केंद्र में प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सकों की देखरेख में पंचकर्म की सभी प्रक्रियाएं कराई जाती हैं. यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कक्ष, स्टीम बाथ सुविधा, हर्बल औषधियों से उपचार और विशेष डाइट की व्यवस्था भी उपलब्ध है.
आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से छुटकारा पाने और शरीर व मन की गहराई से सफाई के लिए पंचकर्म एक चमत्कारी और प्राकृतिक समाधान के रूप में उभर रहा है. अगर आप भी अपनी सेहत को लेकर सजग हैं. तो पंचकर्म को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना एक बेहतर विकल्प हो सकता है.